ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी
भारत मर्चेंट चैंबर्स के ट्रस्ट्री राजीव सिंगल का कहना कि बाजार में डर का माहौल है। MSME के नए पेमेंट नियम से बाजार टूट रहा है, ऐसे में हमें लगता है कि रजिस्ट्रेशन कैंसल करवाना ही सही है। वरना अगर MSME रजिस्ट्रेशन रहेगा, तो हमारे बायर्स ने अगर 15 से 45 दिनों के बीच पेमेंट नहीं दिया तो, वो उनके इनकम में शामिल हो जाएगा। राजीव सिंगल कहते हैं, ‘हमनें हमारे हजारों ट्रेडर्स को कहा है कि अगर आपकी फर्म MSME में रजिस्टर्ड है और आप कोई भी लाभ MSME में रजिस्ट्रेशन का सरकार से नहीं ले रहे है तो आपको आपकी फर्म का MSME से रजिस्ट्रेशन रद्द कर देना चाहिए। अपने खरीदारों को इस बारे सूचित करें कि वो आपसे निश्चिंत होकर व्यापार करे, क्योंकि अब आपसे माल खरीदने पर 43B(h)उन्हें लागू नहीं होगा।’
रजिस्ट्रेशन कैंसल करवाना सही नहीं
CA मनीष गाड़िया कहते हैं, ‘MSME के नए पेमेंट नियम से डरने की जरूरत नहीं और न ही रजिस्ट्रेशन कैंसल करवा कर मिलने वाले तमाम फायदों से वंचित होने की जरूरत है। MSME को समय पर पेमेंट मिले और उसकी वर्किंग कैपिटल की रिक्वायरमेंट पूरी हो सके, इसके लिए इसे कंपनी ऐक्ट में डाला गया। प्रोविजन तो पहले से है, लेकिन इसकी रिपोर्टिंग नहीं हो रही थी, इसलिए इसे इनकम टैक्स के दायरे में डाला और सीए को कहा गया कि वे इसकी ऑडिट रिपोर्टिंग करे। तब यह पता चला और अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि पेमेंट में डिले होने पर 3 गुना इंटरेस्ट देने के अलावा इनकम में ऐड होने की बात आई तो यह बाजार के लिए बैचनी पैदा करने लगा। ऐसे में सलाह है कि डरने की जरूरत नहीं है, अगर पमेंट में डिले हुआ है तो 31 मार्च को आउटस्टेंडिंग खर्चे में क्लैम नहीं मिलेगा। जब तक पेमेंट नहीं होगा, यह इनकम में ऐड रहेगा और पेमेंट होने पर अगले साल डिडक्ट हो जाएगा।
