प्रदूषण भी एक वजह : बढ़ते शहरीकरण के कारण सरकारी एजेंसियों ने प्रदूषण को देखते हुए कई तरह की पाबंदियां लगाई हुई हैं। इसके कारण लोग धीरे-धीरे पशुपालन से भाग रहे हैं। गाजियाबाद में कनावनी के रहने वाले पंकज शर्मा डेयरी और नर्सरी दोनों का बिजनेस करते हैं। वह कहते हैं कि बढ़ता शहरीकरण कम होती डेयरियों के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। जब जगह ही नहीं मिलेगी तो पशुपालन कैसे होगा। सरकारी एजेंसियां डेयरियों का कचरा नाले में बहाने नहीं देती हैं। हमारे पास खुली जगह गाजियाबाद में है नहीं तो ऐसे में लोग पशु बेचकर दूसरे व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। यदि पशुओं की मृत्यु होती है तो उनका अंतिम संस्कार करने के लिए कोई जगह नहीं मिलती है।
बीमारी में नहीं मिला सहयोग : समसपुर गांव निवासी ओमवीर नागर ने बताया कि दूध से ही उनके परिवार की आजीविका चलती है। उन्होंने बताया कि कई महीने पहले लंपी बीमारी भी गोवंशों में चली थी जिससे उनका भी एक गोवंश बीमार हुआ था। उन्होंने बताया कि करीब 15 हजार रुपये उन्होंने इलाज में लगाया था। सरकार या अन्य कहीं से उनको कोई आर्थिक मदद नहीं मिली थी। काफी मुश्किल से उनका पशु बच पाया लेकिन बीमारी के बाद दूध देना उसने बंद कर दिया है। उसके बावजूद भी उसको घर पर रखकर पाल रहे हैं। दादरी के गढी गांव के पशुपालक बलेराम को दर्द है कि अगर उनकी भैंस बीमार हो जाती है या दूध कम देती है तो नुकसान की कोई भरपाई नहीं है। उनकी शिकायत है कि नामी कंपनी 65 रुपये प्रति लीटर दूध बेचती है लेकिन पशुपालकों से दूध खरीदने के रेट में एक साल के भीतर कोई बढ़ोत्तरी नहीं की है।
भूसे की जमाखोरी की आशंका : कन्नौज और फिरोजाबाद के किसानों ने बताया कि गेहूं कम क्षेत्रफल में बोया गया। जो भूसा हुआ, उसे राजस्थान से आए व्यापारी ले गए। सैकड़ों ट्रक भूसा राजस्थान गया है। इससे भी दाम बढ़े। काकोरी, मलिहाबाद और रहीमाबाद के किसानों ने बताया कि अब फिर से भूसा और चोकर के दाम घटने शुरू हो जाएंगे। इसकी वजह है कि दाम बढ़ते देख लोगों ने उसे जमा कर लिया। अब अप्रैल में नया गेहूं और भूसा आने की उम्मीद को देखते हुए लोग जमा भूसे को निकालना शुरू कर देंगे।
दुधारू जानवर के खाने की लागत
-भूसा 100 रुपये
-8 किलो चोकर 240 रुपये
-1 किलो खली 30 रुपये
-अरहर की चूनी 30 रुपये
-रोज का खाना 400 रुपये
एक अच्छी भैंस रोजाना 10 किलो दूध देती है तो अधिकतम 500 रुपये का हुआ। ऐसे में एक जानवर से 100 रुपये का मुनाफा।
