'सर्वे से ज्ञानवापी को कोई नुकसान नहीं', ASI ने दिया भरोसा, आज आ सकता है हाई कोर्ट का फैसला
Updated on
27-07-2023 01:38 PM
प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के भारतीय पुरातत्व विभाग यानी ASI से सर्वेक्षण के मामले को गुरुवार को भी सुनेगा। बुधवार को कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं। मुस्लिम पक्ष ने सर्वे पर रोक की मांग करते हुए सवाल उठाया कि सर्वे से ज्ञानवापी की ऐतिहासिक संरचना गिर सकती है। इस पर चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने ASI से जानना चाहा कि सर्वे से मस्जिद परिसर को कोई नुकसान तो नहीं होगा। इस पर कोर्ट पहुंचे एएसआई के अपर निदेशक आलोक त्रिपाठी ने बताया कि जांच से ज्ञानवापी परिसर के स्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं होगा। टीम जीपीआर (ground-penetrating radar) तकनीक से ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करेगी।
एएसआई ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान हम किसी भी संरचना या दीवार या स्तंभ जैसे उसके हिस्सों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे या ध्वस्त नहीं करेंगे। हम संरचना के किसी भी हिस्से को काटेंगे या खोदेंगे नहीं। सर्वेक्षण गैर-विनाशकारी तकनीक से किया जाएगा और जमीन में भेदने वाले रडार सर्वेक्षण के लिए हमने आईआईटी कानपुर से विशेषज्ञों को बुलाया है। हालांकि, इसके बाद भी मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हमें एएसआई के आश्वासन पर भरोसा नहीं है। इस पर चीफ जस्टिस ने मजाकिया लहजे में कहा कि जब आपको एएसआई पर भरोसा नहीं है तो हमारे आदेश पर कैसे भरोसा करेंगे। कोर्ट ने मामले की सुनवाई गुरुवार दोपहर साढ़े 3 बजे तक के लिए टाल दी है। गुरुवार को ही कोर्ट इस पर फैसला दे सकती है।
जिला जज ने दिया था आदेश वाराणसी के जिला जज ने ज्ञानवापी के विवादित परिसर का एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। मुस्लिम पक्ष इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा है। ज्ञानवापी की मसाजिद इंतेजामिया कमिटी ने कहा कि सर्वे से बिल्डिंग को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही ऐसे एक और मामले में दलीलें नहीं हुई हैं। वाराणसी की जिला अदालत ने इस मामले में किसी विचारणीय मुद्दे पर गौर नहीं किया है। ऐसे में एएसआई सर्वे कराने का आदेश गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत (वाराणसी जिला अदालत) को यह तय करने को कहा था कि केस सुनने लायक है या नहीं। लेकिन निचली अदालत ने आगे बढ़कर सर्वे कराने का फैसला दिया जो सही नहीं है। उस पर से एएसआई ने भी इस मामले में ज्यादा तेजी दिखाई है।
जवाब में मंदिर पक्ष की ओर से कहा गया कि सर्वे के बाद ही मंदिर के स्ट्रक्चर का सही पता चल सकता है। राम जन्मभूमि मामले में भी ऐसा सर्वे हुआ था, लेकिन सर्वे से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इस पर कोर्ट ने डेमो से जानना चाहा कि सर्वे से कोई नुकसान तो नहीं होगा। तब एएसआई के अधिकारी को तलब किया गया।
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