जंग नहीं, चीन की मंशा कुछ और है! आर्मी चीफ ने चीन-पाकिस्तान को लेकर किया आगाह
Updated on
23-03-2023 07:16 PM
नई दिल्ली: भारत के सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने चीन और पाकिस्तान को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमता सिर्फ इसलिए नहीं बढ़ानी चाहिए कि चीन-पाकिस्तान के 'ग्रे जोन वॉरफेअर' को निष्फल किया जा सके बल्कि हमें उन्हें उनके दायरे में भी रोकना है। उन्होंने युद्ध की चर्चा करते हुए सामरिक डिटरेंस इंस्ट्रूमेंट्स की भी बात की। आर्मी चीफ ने कहा कि सीमा विवाद लगातार हमारे लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सीमा प्रबंधन में थोड़ी भी कमी से संघर्ष बढ़ सकता है। ऐसे में डिटरेंस जरूरी है। हालांकि उन्होंने विस्तार से नहीं समझाया लेकिन इसे चीन-पाकिस्तान को दायरे में रखने के लिए भारत की परमाणु ताकत से जोड़कर देखा जा रहा है। वैसे, सबसे महत्वपूर्ण बात सेना प्रमुख ने ग्रे जोन वॉरफेअर को लेकर की है।
बड़े समय तक चलने वाले युद्ध की तैयारी उन्होंने कहा कि हाल के समय में संघर्ष की रणनीति के तौर पर ग्रे जोन दुस्साहस बढ़ा है। तकनीकी विकास के चलते इसका दायरा काफी बढ़ गया है। जनरल पांडे ने चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि भले ही हम इसकी बात करें लेकिन विरोधी हमारे खिलाफ ग्रे जोन रणनीति अपना रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेने की बात करते हुए पांडे ने कहा कि भारत को भी छोटे वॉर की बजाय लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।
ग्रे जोन वॉरफेयर क्या होता है आज के समय में दुनियाभर के देशों के बीच अपने-अपने हित जुड़े हैं। ऐसे में व्यापारिक एवं दूसरे लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए खुलकर युद्ध करने का विकल्प कम ही देश चुनते हैं। लोकतांत्रिक देशों में इसकी संभावना सबसे कम होती है। एक्सपर्ट और सेना के शीर्ष अधिकारी काफी समय से चीन की रणनीति को ग्रे-जोन स्ट्रैटिजी कहते आ रहे हैं। कुछ महीने पहले भी आर्मी चीफ ने भारत को ग्रे जोन क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया था। इस रणनीति के तहत लड़ाई जमीन पर नहीं होती है बल्कि अलग-अलग तरीके से दुश्मन को कमजोर करने की साजिश होती है।ग्रे जोन वॉरफेअर में दुश्मन, विरोधी देश को परेशान करने वाली हरकतें करते हैं। सियासत में दखल, छवि खराब करने की कोशिश, अनियमित संघर्ष, स्वतंत्र फैसले लेने में अड़चन पैदा करना जैसे कदम उठाए जाते हैं। इन फैक्टर्स को पढ़ते समय आप चीन के हाल के वर्षों में भारत के खिलाफ उठाए गए कदमों का उदाहरण देख लीजिए। शीत युद्ध के समय अमेरिका और रूस भी यही किया करते थे।
सेना का बजट बढ़ाने की तैयारी उधर, संसद की एक समिति ने पाकिस्तान-चीन की तरफ इशारा करते हुए अहम बात कही है। समिति ने कहा कि भारतीय सेना का बजट बढ़ाया जाना चाहिए ताकि दोनों दुश्मन पड़ोसियों से मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता बढ़ाई जा सके। सेना के साजोसामान के स्वदेशीकरण को लेकर रक्षा मंत्रालय के प्रयासों की भी प्रशंसा हुई। समिति ने कहा कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित फंड में हमेशा बढ़ोतरी होती रहनी चाहिए।
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