अब भारतीय मसालों पर सवाल नहीं उठाएगी दुनिया! एक्शन में केंद्र सरकार और स्पाइसेज बोर्ड
Updated on
21-05-2024 02:31 PM
नई दिल्ली: सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में एमडीएच और एवरेस्ट के मसालों पर उठे विवाद के बाद सरकार ने निर्यात होने वाले मसालों की जांच प्रक्रिया कड़ी कर दी है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इन कंपनियों के चार प्रोडक्ट्स में एथिलीन ऑक्साइड (EIO) होने से जुड़े सवाल उठने के बाद मसाला बनाने वाली कंपनियों के पास से सैंपल लिए गए। इनकी जांच की गई। एक्सपोर्ट से पहले की जांच प्रक्रिया के बारे में व्यापक दिशानिर्देश जारी किए गए जिससे भारतीय मसालों के बारे में उठी चिंताओं को दूर किया जा सके।
सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग ने कथित तौर पर कीटनाशक EtO की मात्रा तय मानक से अधिक होने का हवाला देकर एमडीएच और एवरेस्ट के 4 प्रोडक्ट्स को बाजार से हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी उत्पादों पर निगरानी बढ़ाई गई। एमडीएच और एवरेस्ट का कहना है कि उनके उत्पादों की क्वॉलिटी बिल्कुल ठीक है। सरकारी अधिकारी ने कहा कि विवाद उठने के बाद हॉन्गकॉन्ग और सिंगापुर निर्यात किए जाने वाले मसालों की जांच अनिवार्य करने जैसे कदम उठाए गए।
ETO जांच अनिवार्य
अधिकारी ने कहा, 'सभी निर्यातकों के लिए गाइडजाइंस जारी की गई हैं कि वे जिन देशों में मसाला निर्यात करते हैं, वहां ETO के बारे में जो भी मानक हैं, उनके हिसाब से पूरी जांच-परख माल भेजने से पहले कर लिया करें।' स्पाइसेज बोर्ड ने सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग भेजे जाने वाले मसालों में EtO जांच को 6 मई से अनिवार्य कर दिया था। हॉन्गकॉन्ग में फूड प्रोडक्ट्स में EtO पूरी तरह प्रतिबंधित है। सिंगापुर में 50 पार्ट्स पर मिलियन तक की इजाजत है यूरोपियन यूनियन ने 0.1 मिलीग्राम प्रति किलो तक की सीमा तय की है। अधिकारी ने कहा कि इंडियन सैंपल के रिजेक्ट होने का रेट 1 प्रतिशत से भी कम रहा है। '2023-24 में 14 लाख टन मसाले में से केवल 0.2% माल ही ऐसा था, जो विभिन्न देशों के मानकों पर खरा नहीं पाया गया था। वहीं, भारत में आयात होने वाले फूड कंसाइनमेंट्स में से 0.73% हिस्सा हमारे स्टैंडर्ड के हिसाब से ठीक नहीं पाया गया।'
साख का मसला, कड़ाई जरूरी
वित्त वर्ष 2024 में 1.4 करोड़ टन मसाले निर्यात करने वाले भारत के लिए यह मामला सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग ने भले ही बैन के बजाय रिकॉल का आदेश दिया, लेकिन इससे भारतीय मसालों पर गंभीर सवाल उठ गया। कंपनियां जरूरी जांच-परख करें और स्पाइसेज बोर्ड इनको सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया कड़ी करे क्योंकि यह साख का मसला है।
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