सस्ते कर्ज के लिए अभी करिए और इंतजार, आरबीआई की बैठक शुरू , फैसले का इंतजार
Updated on
07-12-2023 02:04 PM
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिन चलने वाली बैठक बुधवार को शुरू हुई। यह माना जा रहा है कि एमपीसी इस बार भी रीपो रेट को बरकरार रख सकती है। इसका प्रमुख कारण चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट का उम्मीद से अधिक होना और इन्फ्लेश्न में नरमी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास छह सदस्यीय एमपीसी के निर्णय की घोषणा शुक्रवार को करेंगे।
मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है। आरबीआई ने पिछली चार मीटिंग्स में रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। अंतिम बार फरवरी में इसे बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था। इसके साथ रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके कारण ग्लोबल सप्लाई बाधित होने से महंगाई बढ़ने के कारण मई, 2022 से शुरू हुआ रीपो रेट में बढ़ोतरी का सिलसिला एक तरह से थम गया। दरअसल, सरकार ने आरबीआई को रिटेल इन्फ्लेशन को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी हुई है।
मीटिंग से क्या है अपेक्षा?
डॉयचे बैंक रिसर्च के अनुसार, आरबीआई 2023-24 के लिए जीडीपी के पूर्वानुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर सकता है। इन्फ्लेशन के पूर्वानुमान को 5.4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखे जाने की संभावना है। आरबीआई रीपो रेट को अपरिवर्तित रखेगा। साथ ही नकदी की स्थिति को सख्त बनाये रख सकता है।
इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में जीडीपी आंकड़ा आरबीआई के पिछले अनुमान से अधिक रहा है। इन सबको देखते हुए अनुमान है कि आरबीआई रीपो रेट को बरकरार रख सकती है।
क्या है देश की आर्थिक स्थिति?
मैन्युफैक्चरिंग, खनन और सर्विस सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन के साथ देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 7.6 प्रतिशत रही। इसके साथ भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाला देश बना हुआ है। एसकेए ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा का कहना है कि इस बार भी उम्मीद है कि आरबीआई रीपो दर को स्थिर रखेगा, इससे संभावित घर खरीदारों को लाभ होगा। एमपीसी ने अक्टूबर की समीक्षा में रिटेल इन्फ्लेशन 2023-24 में 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
क्या है रीपो रेट की अहमियत
जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो RBI रीपो रेट बढ़ाकर इकॉनमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। रेट ज्यादा होगा तो बैंकों को RBI से मिलेने वाला कर्ज महंगा होगा। फिर बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे मनी फ्लो कम होता है और डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। बाजार में मनी फ्लो बढ़ाने के लिए रीपो रेट को कम किया जाता है। इससे ग्राहकों को सस्ती दर पर लोन मिलता है।
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