पांच मार्च 1949 को जन्मे बर्नार्ड अरनॉल्ट ने साल 1984 में लग्जरी गुड्स मार्केट में कदम रखा था। उन्होंने एक टेक्सटाइल ग्रुप का अधिग्रहण किया जिसके पास क्रिश्चियन डायर (Christian Dior) का भी मालिकाना हक था। चार साल बाद उन्होंने इस कंपनी के बाकी बिजनस बेच दिए और एलवीएमएच (LVMH) में कंट्रोलिंग स्टेक खरीद लिया। कुछ साल पहले उन्होंने अमेरिका की जूलरी कंपनी Tiffany & Co को 15.8 अरब डॉलर में खरीदा। यह उनके ग्रुप की अब तक की सबसे बड़ी डील थी।
साल 1985 में आरनॉल्ट ने फ्रांस की सरकारी दिवालिया टेक्सटाइल कंपनी बुसॉक (Boussac) को खरीदा। इसके बाद उन्होंने दो साल के अंदर नौ हजार कर्मचारियों को निकाल दिया था। इससे आरनॉल्ट को 'द टर्मिनेटर' कहा जाने लगा। उन्होंने डियोर ब्रांड को छोड़कर ग्रुप की अधिकांश एसेट्स को बेच दिया और सिर्फ फैशन सेगमेंट पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया। आरनॉल्ट पहले भी कई बार अमीरों की लिस्ट में पहले नंबर पर पहुंचे हैं लेकिन ज्यादा समय तक वहां टिक नहीं पाए हैं। इस बार भी उनके ज्यादा देर तक टिकने की संभावना नहीं है क्योंकि बेजोस की नेटवर्थ उनसे केवल एक अरब डॉलर कम है।