वंदे भारत में पैसेंजर को दिया कीड़े वाला खाना, रेलवे ने ठोका 50 लाख का जुर्माना, कॉन्ट्रैक्ट भी हुआ रद्द
Updated on
26-03-2026 12:31 PM
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वंदे भारत ट्रेन का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें यात्रियों को परोसे गए खाने में कीड़े नजर आ रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि जब पैसेंजर इस बारे में पैंट्री मैनेजर से पूछता है तो स्टाफ कहता है कि यह केसर है। पैसेंजर फिर उसे दूसरी थाली दिखाता है जिसमें सफेद रंग के कीड़े साफ-साफ रेंगते हुए दिख रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि पटना-टाटा नगर वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को यह खाना परोसा गया था। रेलवे में इस तरह के घटिया खाने की शिकायत अक्सर आती रहती है। हालांकि रेलवे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो एक पैसेंजर पैंट्री मैनेजर से खाने की शिकायत कर रहा है। वह दही दिखाते हुए कहता है कि इसमें कीड़ा है। इस पर मैनेजर के साथ आया एक स्टाफ कहता है कि इसमें तो केसर है। पैसेंजर फिर उसे दूसरी थाली दिखाता है जिसमें सफेद रंग के कीड़े रेंगते हुए साफ-साफ दिख रहे हैं। पैसेंजर कहता है, 'अगर इस खाने को खाकर मैं मर जाऊंगा तो रेलवे की क्या जिम्मेदारी होगी।' इस पर पैंट्री मैनेजर और स्टाफ से कुछ कहते नहीं बन रहा है।
रेलवे की सख्त कार्रवाई
हालांकि रेलवे ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। रेलवे ने एक बयान में कहा, '15 मार्च 2026 को ट्रेन संख्या 21896 (पटना – टाटानगर वंदे भारत एक्स) में पाई गई अनियमितता के संबंध में यात्री द्वारा भोजन की गुणवत्ता पर की गई शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। कार्रवाई करते हुए IRCTC पर ₹10 लाख का दंड लगाया गया है, संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर ₹50 लाख का जुर्माना तथा कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेशन के आदेश दिए है । यात्रियों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।'
क्यों नहीं है डर?
रेलवे ने ट्रेन में कैटरिंग सर्विस उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों या कांट्रेक्टरों के लिए रेलवे बोर्ड ने सख्त नियम बना रखे थे। इनका उल्लंघन करने पर भारी फाइन/पेनल्टी का प्रावधान था। लेकिन अब रेलवे बोर्ड ने कहा है कि अब उन पर कम पेनल्टी लगाई जानी चाहिए। उनकी काउंसलिंग की जानी चाहिए और अच्छी सेवा देने के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। IRCTC के सीएमडी को रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक टूरिज्म एंड कैटरिंग ने बीते सप्ताह इस बारे में चिट्ठी भेजी है।
इसमें कहा गया है कि कैटरिंग ठेकेदारों के ऊपर फाइन लगाने की घटना कम से कम हो। फाइन भी लगे तो उसी हिसाब से जितने क्वांटम का भोजन परोसा गया है। ठेकेदारों पर फाइन लगाने के बजाय उन्हें समझाया जाए। उन्हें प्रशिक्षण दिया जाए। जरूरत पड़े तो चेतावनी दे दें। कैटरिंग ठेकेदारों पर तभी फाइन हो जबकि फूड प्वाइजनिंग की घटना हो, एक ही ट्रेन से ढेरों कंप्लेन आए, कम भोजन सप्लाई की लगातार शिकायत हो, भोजन सर्व करने का तरीका अनहाइजेनिक हो या ओवरचार्जिंग हो।
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