हरियाणवी 'रामायण' में हनुमान, लक्ष्मण और राम को पल भर बर्दाश्त न कर पाए लोग, रामानंद सागर की याद में डूबे
Updated on
15-06-2026 01:08 PM
रामानंद सागर की 'रामायण' टीवी के इतिहास में अब तक का वो महान शो है जिसकी तुलना करने की कोशिश तो बहुत लोगों ने की, लेकिन कोई कर नहीं पाया। अब नितेश तिवारी भी एक 'रामायण' लेकर आ रहे हैं, जिसे भारत के सबसे महंगे फिल्म प्रोजेक्ट के तौर पर बताया जा रहा है। दो हिस्सों में बनने वाली इस फिल्म का बजट लगभग 2,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है और इसमें रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (सीता) और यश (रावण) जैसे बड़े कलाकार शामिल हैं। वैसे तो, 'रामायण' के कई शोज बनाए गए, लेकिन अब जो क्लिप वायरल हो रही है, इसने लोगों को हंसाने के साथ-साथ उन्हें गुस्सा भी दिला दिया है।
इस क्लिप में 'रामायण' का एक सीन दिखाया गया है और इसे हरियाणवी रामायण बताया जा रहा है। इसमें हनुमान जी का एक सीन शूट किया गया है, जिसमें हनुमान बैठकर श्रीराम का नाम ले रहे हैं। तब तक राम आकर हरियाणवी में हनुमान से बात करते हैं। डायलॉग्स सारे हरियाणवी में हैं और ये कॉमेडी की तरह शूट किया गया है। दोनों सीता माता के हरण की बात कर रहे हैं। बीच में लक्ष्मण का किरदार भी बोलता है।
हरियाणवी 'रामायण' ने छेड़ी चर्चा
इस क्लिप को लेकर इंटरनेट पर बड़ी चर्चा छिड़ गई है। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने इस पर रिएक्ट करना भी शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा- कृपया रामायण की ऐसी पोस्ट ना करें। उचित समझे तो डिलीट करें। एक ने कहा- हमें ऐसी बेवकूफी भरी बातें पोस्ट नहीं करनी चाहिए जिनसे सनातन को नुकसान पहुंचे। एक हरियाणवी होने के नाते, मुझे लगता है कि इन एक्टर्स की भाषा गलत है। एक ने लिखा- भगवान राम का सरासर अपमान है। एक ने कहा- रामानंद सागर ये देखते तो सहम जाते।
'रामायण' को लेकर गलती बर्दाश्त नहीं
बता दें कि जब 1987-88 में 'रामायण' पहली बार प्रसारित हुई, तो यह भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हुई। हर एपिसोड पर लगभग 9 लाख रुपये की अनुमानित लागत के साथ, इसे उस समय के सबसे महंगे टीवी शो में से एक माना जाता था। इस सीरीज ने करोड़ों दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया और एक साझा राष्ट्रीय अनुभव बन गई। इसे लेकर तभी से लोग एक अलग तरह का सम्मान रखते हैं और 'रामायण' के बारे में एक गलती भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं।
'रामायण' के लिए रुक जाता था सरकारी कामकाज
इसकी लोकप्रियता असाधारण स्तर तक पहुंच गई थी। रविवार की सुबह सड़कें सुनसान हो जाती थीं, दुकानें बंद रहती थीं और परिवार श्रद्धापूर्वक अपने टेलीविजन सेट के सामने इकट्ठा होते थे। इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल के अनुसार, जब लोग इस महाकाव्य को देखने के लिए एक ही टीवी के सामने जमा होते थे, तो पूरे शहर की गतिविधियां थम जाती थीं। यहां तक कि सरकारी कामकाज के कार्यक्रम भी प्रभावित होते थे।
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