530000000 तोला सोना गिरवी रख कर लोन लिया है लोगों ने, जान लीजिए पूरी बात
Updated on
22-03-2024 01:15 PM
नई दिल्ली: महीने का तीसरा सप्ताह चल रहा है। निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में से अधिकतर की सैलरी पहले ही खर्च हो गई है। यही हालत रामजीवन की भी है। वह नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करते हैं। हर महीने की सात तारीख को सैलरी आती है। उनकी पूरी सैलरी खर्च हो चुकी है। अगले सोमवार को ही होली का त्योहार आ रहा है। साल भर का त्योहार है तो वह मनेगी ही। घर में पैसे नहीं हैं तो क्या हुआ, पुआ-पूड़ी बनाना है। गुजिया बनाना है। इसके लिए तो सामान तो आएगा ही। लेकिन सामान आए कैसे। त्योहार मनाने के लिए रामजीवन पत्नी के गहने गिरवी रख कर कुछ पैसे ले आए। अब त्योहार मनाने की टेंशन खत्म। पूरा परिवार खुश है।
बढ़ रहा है सोने के बदले लोन
यह कहानी सिर्फ रामजीवन की ही नहीं है। अधिकतर निम्न मध्यम वर्गीय लोगों की यही दास्तां है। इस समय लोगों का खर्च ही खर्च है। दो दिन बाद ही होली है। शादी-ब्याह का मौसम तो पहले ही शुरू हो ही गया है। ऐसे में जिनके पास पर्याप्त बचत नहीं है, वे शादी-ब्याह ही नहीं, त्योहार मनाने के लिए भी लोन ले रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए लोन ले रहे हैं। लोन लेने के लिए सबसे आसान तरीका है सोने को गिरवी रख कर लोन लेना।सकर ग्रामीण और अर्ध ग्रामीण इलाकों में इस तरह के रुझान में तेजी देखी जा रही है। छोटे कारोबारी और व्यक्तिगत तौर पर लोग सोने को गिरवी ज्यादा रख रहे हैं।
53 करोड़ तोला सोना रखा है गिरवी
रिजर्व बैंक की सोने पर एक रिपोर्ट पिछले दिनों ही आई है। इसमें बताया गया है कि इस समय 53 करोड़ तोला (यहां तोला का मतलब 10 ग्राम से है) या 53,00,000 किलो सोना गिरवी रख कर लोन लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस समय देश में गोल्ड लोन का मार्केट करीब 15 लाख करोड़ रुपये का है। यह बीते एक साल में 17 फीसदी बढ़ा है। अनुमान है कि साल 2029 तक यह सालाना 12.22 फीसदी की दर से बढ़ेगा।
संगठित क्षेत्र अभी भी आधे से कम
अभी गोल्ड लोन के क्षेत्र में काफी एनबीएफसी आ गई हैं। कई बैंक भी गोल्ड लोन देते हैं। तब भी देश में गोल्ड लोन मार्केट में संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम ही है। रिपोर्ट के अनुसार अभी गोल्ड लोन के मार्केट में संगठित क्षेत्र 40 फीसदी बाजार पर कब्जा जमाए हुए है। मतलब कि करीब 15 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन के बाजार में उनकी हिस्सेदारी छह लाख करोड़ करोड़ की है। अभी भी साहूकारों और महाजनों का कब्जा 60 फीसदी या नौ लाख करोड़ रुपये के बाजार पर है।
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