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र साल 20% की दर से बढ़ रहा है प्लास्टिक कचरा, सौ में से 30% ही हो पाता है रिसाइकिल

Updated on 12-01-2023 07:05 PM
नई दिल्ली: हम-आप, सभी के जीवन में प्लास्टिक (Plastic) बुरी तरह से अपनी जगह जमा चुका है। आपको पता है कि इस समय सिर्फ अपने देश में प्लास्टिक का कितना कचरा निकलता है। और इनमें से कितने को रिसाइकिल (Recycle of Plastic Waste) किया जाता है। प्लस्टिक के कचरे में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी किन राज्यों की है? इन्हीं सब सवालों का जवाब देने के लिए देश के अग्रणी संस्थान इंडियन इंस्टीच्यूट आफ साइंस (The Indian Institute of Science (IISc) और प्रेक्सिस ग्लोबल अलायंस (Praxis Global Alliance) ने एक रिपोर्ट तैयार किया है। इस रिपोर्ट को मेरिको इनोवेशन फाउंडेशन (Marico Innovation Foundation) के सहयोग से तैयार किया गया है।

तेजी से बढ़ रहा है प्लास्टिक का कचरा

'इनोवेशन इन प्लास्टिक, द पोटेंशियल एंड पॉसिबिलिटीज' “Innovation in Plastic: The Potential and Possibilities” नाम से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले पांच साल के दौरान प्लास्टिक की खपत तो तेजी से बढ़ी ही है, उससे दूनी तेजी से प्लास्टिक का कचरा निकल रहा है। अपने यहां साल 2016-17 के दौरान हर साल 13.7 मिलियन टन प्लस्टिक का उपयोग होता था। यह साल 2019-20 में बढ़ कर 19.8 मिलियन टन पर पहुंच गया। मतलब कि हर साल 9.7 फीसदी के सीएजीआर की दर से बढ़ोतरी।

प्लास्टिक कचरे के निकलने की रफ्तार और भी तेज

इस समय भारत में हर साल 19.8 मिलियन टन प्लास्टिक का उपयोग होता है। इसमें सालाना बढ़ोतरी की दर है करीब 10 प्रतिशत। लेकिन, इसके कचरे की बात करें तो इसमें बढ़ोतरी की दर प्लास्टिक के उपयोग के दर से भी ज्यादा है। साल 2016-17 के दौरान अपने यहां साल में 16 लाख टन प्लास्टिक का कचरा निकलता था जो कि साल 2019-20 में बढ़ कर 34 लाख टन पर पहुंच गया। मतलब कि 20.7 फीसदी के सीएजीआर (CAGR) की दर से बढ़ रहा है।

सिर्फ 30 फीसदी प्लास्टिक कचरा हो पाता है रिसाइकिल

आप जान ही रहे हैं कि अपने यहां हर साल 34 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। जिसमें से केवल 30 प्रतिशत कचरे का ही निस्तारण (री-साइक्लिंग) किया जाता है। अब आपके जेहन में सवाल उठता होगा कि शेष कचरा कहां जाता है? तो इसका जवाब है कि प्लास्टिक का बांकी कचरा कूड़े के पहाड़ में जाता है। जहां कचरे के लिए डंपिंग यार्ड नहीं है, वहां यह खेतों में फैल रहा या नदियों और समुद्रों में डाला जा रहा है। इससे धरती बंजर हो रही है, नदियां प्रदूषित हो रही हैं। अब तो समुद्र भी प्लास्टिक के कचरे से अछूता नहीं है। इसलिए तो मछलियों के पेट में भी प्लास्टिक के अवशेष मिल रहे हैं।

प्लास्टिक कचरा पैदा करने में कौन राज्य आगे

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु प्लास्टिक कचरा पैदा करने में सबसे आगे हैं। ये तीनों राज्य मिल कर भारत में उत्पन्न होने वाले कुल प्लास्टिक कचरे में 38 प्रतिशत का योगदान करते हैं। इन राज्यों में अधिकतर प्लास्टिक का कचरा औद्योगिक होता है जो कि पैकेजिंग के काम आता है। देखा जाए तो जितना प्लास्टिक का कचरा निकलता है, उसमें से 59 फीसदी तो सिर्फ पैकेजिंग यूज से निकलता है। इसके बाद बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन की हिस्सेदारी 13 फीसदी की है। कृषि जगत की हिस्सेदारी 9 फीसदी की है।

प्लास्टिक कचरे में ज्यादा क्या

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लास्टिक कचरे में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पांच चीजों की है। इनमें पहला स्थान पोलीथिन बैग का है। इसके बाद प्लास्टिक के बोतलों का स्थान है। फिर एफएमसीजी प्रोडक्ट की पैकिंग का है। इसके साथ ही ग्रोसरी बैग और फूड रैपिंग भी खूब कचरा फैलाते हैं। साल में इन सब चीजों का ही प्लास्टिक कचरा करीब 23 लाख टन का होता है।

प्लास्टिक कचरे पर हम पर क्या प्रभाव

'इनोवेशन इन प्लास्टिक, द पोटेंशियल एंड पॉसिबिलिटीज' नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते प्लास्टिक कचरे के ढेरों दुष्प्रभाव दिख रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव क्लाइमेट पर पड़ रहा है। ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से बढ़ रहा है। इससे मौसम का चक्र गड़बड़ा गया है। समय पर वर्षा नहीं हो रही है तो बेमौसम की बारिश से फसलें खराब हो रही हैं। धरती में प्लस्टिक का कचरा जाने से जमीन बंजर हो रही है। नदियां और समु्द्र भी प्रदूषित हैं। प्रदूषित अनाज, प्रदूषित मछली खाने से लोग रोग के शिकार हो रहे हैं। बताया जाता है कि कैंसर का एक प्रमुख कारक प्लास्टिक का कचरा भी है।

क्या है निदान

इस रिपोर्ट में रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है, ‘‘भारत में डंपिंग के बजाय रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ‘लैंडफिल’ और ‘इंसिनरेशन’ कर लगाया जाना चाहिए।’’ रिपोर्ट का कहना है कि भारत में प्लास्टिक की खपत पिछले पांच वर्षों में काफी तेज गति से बढ़ी है, और इसलिए इसका कचरा भी बढ़ा है। यदि लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए तो इसमें कमी आ सकती है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही अब सबसे बड़ा हथियार बनेगा।


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