पाकिस्तान-चीन से एक साथ निपटने की तैयारी! हथियारों की नहीं होगी कमी, बड़े बदलाव की आहट
Updated on
03-10-2025 03:45 PM
नई दिल्ली: सरकार देश में डिफेंस सेक्टर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसके तहत विदेशी कंपनियों (OEMs) की भारतीय यूनिट को डोमेस्टिक वेंडर माना जा सकता है। यह रक्षा खरीद के नियमों में एक अहम बदलाव होगा। डिफेंस इंडस्ट्री लंबे समय से इसकी मांग कर रही थी। इस कदम से इन विदेशी कंपनियों को भारत की रक्षा खरीद में आसानी से हिस्सा लेने का मौका मिलेगा और देश में ही मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। ET की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।
सरकार ने अगस्त में पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गाबा की अध्यक्षता में एक खास टास्क फोर्स बनाई गई थी। इसका काम मुख्य क्षेत्रों में नए सुधारों को आगे बढ़ाना है। सूत्रों के मुताबिक इस टास्क फोर्स की बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी। इस बदलाव का मुख्य मकसद खरीद प्रक्रिया में आने वाली रुकावटों को कम करना है। साथ ही डिफेंस ऑफसेट क्लॉज को और आसान बनाना है। ऑफसेट क्लॉज के तहत विदेशी कंपनियों को ठेका जीतने पर भारत में निवेश करना होता है। अभी की खरीद नीति घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करना चाहती है। इसलिए वह स्थानीय विक्रेताओं को प्राथमिकता देती है।
क्या होगा फायदा?
विदेशी कंपनियों की सहायक कंपनियों को भारतीय विक्रेता मानने से वे स्थानीय कंपनियों के बराबर आ जाएंगी। इससे उन्हें खरीद में समान अवसर मिलेंगे। उम्मीद है कि इससे और भी विदेशी कंपनियां भारत में अपना काम शुरू करने के लिए प्रेरित होंगी। पैनल ने कुछ और सुझाव भी दिए हैं। इनमें से एक यह है कि नामांकन-आधारित सिस्टम को धीरे-धीरे खत्म किया जाए। इसकी जगह खुली निविदा (ओपन टेंडरिंग) प्रणाली लाई जाए। इससे निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी
यह नई नीति अगले साल के बजट से पहले आ सकती है। पैनल ने कुछ और प्रस्ताव भी रखे हैं। इनमें रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के प्रारूप और समय-सीमा को एक जैसा बनाना शामिल है। इसके अलावा स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक खास रक्षा स्टार्टअप नीति बनाने का भी प्रस्ताव है। इन सभी सुझावों पर अंतिम फैसला एक समिति लेगी। इस समिति का नेतृत्व अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) कर रहे हैं। यह समिति रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 में बदलाव पर काम कर रही है। इसका लक्ष्य खरीद में होने वाली देरी को कम करना है।
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