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'राहुल गांधी की मुसलमान जोड़ो यात्रा, नीतीश का अल्पसंख्यक प्रेम', जानिए 2024 में वोटर कितना कर सकता है खेल?

Updated on 02-06-2023 08:18 PM
नीलकमल, पटना: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 9 साल पूरे हो चुके हैं। इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता इस सरकार में हुए विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं। बीजेपी कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से जनता के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम और योजना की जानकारी घर घर पहुंचाने का काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस समेत बीजेपी विरोधी क्षेत्रीय पार्टियां अलग मिशन पर हैं। अभी विपक्ष मोदी सरकार के 10 साल पूरे होने के बाद उन्हें केंद्र की सत्ता से बेदखल करने की योजना पर काम कर रहा है। कर्नाटक में मिली जीत के बाद कांग्रेस वैसे ही उत्साहित है। लेकिन इस पूरे सियासी पैंतरे को मुस्लिम वोटरों से जोड़ कर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी ने की मुसलमान जोड़ो यात्रा न कि भारत जोड़ो- बीजेपी

2024 लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी को रीलॉन्च करने के उद्देश्य से कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा कार्यक्रम चलाया था। राहुल गांधी की कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यह यात्रा काफी चर्चित रही थी। क्योंकि इसी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने देश की सेना के लिए यह कहा था कि बॉर्डर पर हमारी सेना के जवान पीटे जा रहे हैं। राहुल गांधी के इस बयान की देशभर में काफी आलोचना हुई थी। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक लगातार यह कहते रहे हैं कि राहुल गांधी की यह यात्रा भारत जोड़ो नहीं, बल्कि मुसलमान जोड़ो यात्रा है। अजय आलोक ने यह भी कहा कि कांग्रेस की इस यात्रा का रूट चार्ट देखने पर पता चलता है कि राहुल गांधी की यात्रा उन्हीं जगह से ज्यादातर गुजरी है, जिधर मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा रहते हैं। इसलिए राहुल गांधी की यह यात्रा निश्चित तौर पर मुसलमानों को जोड़ने की यात्रा थी। क्योंकि कांग्रेस को पता है कि 1990 के पहले जो मुस्लिम समुदाय एकमुश्त कांग्रेस को वोट देता था। वह धीरे-धीरे क्षेत्रीय पार्टियों में शिफ्ट हो चुका है। कांग्रेस की यह यात्रा उन्हीं मुसलमानों को फिर से साथ जोड़ने के लिए थी। जिसमें कांग्रेस काफी हद तक सफल भी रही है।

राहुल गांधी की नजर में मुस्लिम लीग सेकुलर पार्टी

कांग्रेसी नेता राहुल गांधी इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर हैं।अमेरिका में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने यह कहा कि 'मुस्लिम लीग' एक सेक्युलर पार्टी है। लेकिन भारत में मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है। उनके ऊपर हमले किए जा रहे हैं। उनके अधिकारों को छीना जा रहा है और उन्हें बोलने तक नहीं दिया जा रहा। राहुल गांधी यहां तक बोल गए कि 1980 में दलितों का जो हाल था वर्तमान समय में वही स्थिति देश के मुसलमानों की है। इसके अलावा राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उपहास उड़ाते हुए कहा कि एक व्यक्ति को यह लगता है कि वह सब कुछ जानता है। राहुल गांधी ने अमेरिका में फिर कहा कि भारत का लोकतंत्र खत्म हो चुका है क्योंकि देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सरकार का कब्जा हो चुका है।

देश के मुसलमान किसके साथ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। विश्लेषकों का कहना है कि 2014 से लेकर अब तक नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार की वजह से देश के हिंदुओं में धार्मिक भावनाओं का पुनः जागरण हुआ है। इसके साथ ही अपने 9 साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व में भारत की नई पहचान बनाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट रूप से कहना है कि आज पूरा विश्व भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को देख रहा है। वैश्विक स्तर पर ताकतवर देश के ताकतवर नेता भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता और ताकतवर लीडर के रूप में जानने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश के भीतर नरेंद्र मोदी की सरकार बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ देश की जनता तक पहुंचा रही है। लेकिन कुछ पार्टियां मुसलमानों को अपने पक्ष में करने की होड़ में तुष्टिकरण की राजनीति पर उतर चुकी है।

एक्सपर्ट्स की राय जानिए और समझिए

देश विरोधी ताकतें भी मुसलमान और जाति में बंटे हुए हिंदुओं के दम पर लगातार देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। देश विरोधी ताकतें भारत की बढ़ती ताकत और अर्थव्यवस्था को हर हाल में रोकना चाहती है। राजनीतिक और चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार भले ही बिना किसी भेदभाव के देश की जनता के साथ मुसलमानों को भी योजना का लाभ पहुंचा रही है। लेकिन देश के 98 प्रतिशत मुसलमान आज भी भारतीय जनता पार्टी के विरोध में मतदान करते हैं। इसी मुसलमान वोट बैंक को हासिल करने के लिए बीजेपी विरोधी राजनीतिक दलों के बीच होड़ मची है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मुसलमान पूरी तरह से कांग्रेस के साथ जुड़ चुके हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस पूरे देश में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ती है तो निश्चित तौर पर उन्हें फायदा होने वाला है। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव के मैदान में उतरती है तो उसे नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इधर मुसलमानों का झुकाव कांग्रेस की तरफ देखते हुए क्षेत्रीय पार्टियों की चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत तमाम क्षेत्रीय दलों के नेता खुलकर तुष्टिकरण की राजनीति करने लगे हैं।

लव जिहाद-हिंदू लड़कियों की हत्या पर नीतीश चुप क्यों- बीजेपी

बीजेपी के पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का कहना है कि मुस्लिम वोट के चक्कर में नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता कुछ भी कर सकते हैं। बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार घुसपैठिए रोहिंग्या बांग्लादेशियों को बसाकर उन्हें मुफ्त में राशन बिजली पानी मुहैया करा रही है। ये भी तुष्टीकरण की ही एक बानगी है। वहीं बिहार के सीमांचल का इलाका समेत कई जिलों में तेजी से बदलती डेमोग्राफी यह बताने के लिए काफी है कि राज्य में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ कितनी तेजी से हो रही है। लेकिन नीतीश सरकार ऐसे घुसपैठियों पर रोक लगाने के बजाए PFI जैसी देश विरोधी संस्थाओं पर केंद्र सरकार के बैन का विरोध करती है। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि नीतीश कुमार के मुंह से कभी भी लव जिहाद के खिलाफ एक शब्द नहीं निकला। हाल ही में जिस प्रकार से दिल्ली में अभी साक्षी की हत्या की गई है उसे लेकर उनके मुंह से शब्द नहीं निकलते। नीतीश कुमार के मंत्री हिंदुओं के सबसे पवित्र धर्म ग्रंथ रामचरितमानस का अपमान करते हैं। उनकी पार्टी के नेता बिहार के शहर को कर्बला बनाने की बात करते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेते। प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि देश और बिहार की जनता कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को अच्छी तरह से पहचान चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 में बिहार विधानसभा के चुनाव में जनता तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को करारा जवाब देकर उनका राजनीति का अंत करने वाली है।

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