निवेशकों को मिली राहत: म्यूचुअल फंड में जॉइंट खातों के लिए अब यह जरूरी नहीं!
Updated on
02-05-2024 01:51 PM
मुंबई: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। अब संयुक्त रूप से रखे जाने वाले म्यूचुअल फंड खातों (Mutual Funds Accounts) के लिए किसी व्यक्ति के नॉमिनेशन घोषित करना या ना करना, ऑप्शनल बना दिया है। सेबी ने यह कदम एक वर्किंग ग्रुप द्वारा म्युचूअल फंड रेगुलेशन की समीक्षा करने और कारोबार को आसान बनाने के लिए उपायों की सिफारिश करने के बाद उठाए हैं।
क्या मानना है एक्सपर्ट्स का
एक्सपर्ट्स का का मानना है कि जॉइंट फोलियो होल्डर्स (Mutual Fund Joint Folio Holders) के लिए किसी को नॉमिनेट करने की आवश्यकताओं में यह छूट फायदेमंद होगी। इससे जीवित सदस्य नॉमिनी माना जाएगा और नॉमिनेशन का प्रोसेस आसान बनेगा। उल्लेखनीय है कि म्यूचुअल फंड होल्डर्स के लिए नॉमिनी अनिवार्य किए जाने के बाद निवेशक नॉमिनेशन प्रोसेस में लगे हुए हैं। इस दौरान निवेशकों ने यह महसूस किया कि जॉइट रूप से रखे जाने वाले म्यूचुअल फंड अकाउंट्स में किसी व्यक्ति को नॉमिनी बनाने में परेशानिया हो रही हैं। क्योंकि जॉइंट अकांउट में जो जीवित सदस्य है वह ऑटोमैटिक तरीके से नॉमिनी ही माना ही जाएगा।
कहां नॉमिनी जरूरी
अभी भी म्यूचुअल फंड के कुछ फोलियो के लिए नॉमिनी जरूरी है। यह व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड होल्डर्स के मामले में है। ऐसे फोलियो लिए नॉमिनी जरूरी है। इसके साथ ही रेगुलेटर ने सभी मौजूदा व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड होल्डर्स के लिए
अब फंड मैनेजमेंट की लागत भी होगी कम
SEBI ने फंड मैनेजर के संबंध में मौजूदा प्रावधान को आसान बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत सेबी ने 'फंड हाउस' को कमोडिटी और विदेशी निवेश की निगरानी के लिए एक ही 'फंड मैनेजर रखने की अनुमति दी है। इससे उसके मैनेजमेंट की लागत कम हो जाएगी। सेबी ने कहा कि कमोडिटी आधारित फंड्स जैसे गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड), सिल्चर ETF और कमोडिटी बाजार में भाग लेने वाले अन्य फंड के लिए समर्पित फंड मैनेजर की नियुक्ति वैकल्पिक होगी। साथ ही, विदेशी निवेश करने के लिए भी समर्पित फंड मैनेजर की नियुक्ति वैकल्पिक होगी। घरेलू और विदेशी/कमोडिटी फंड के लिए एक फंड मैनेजर की नियुक्ति का मकसद उसके मैनेजमेंट की लागत को कम करना है।
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