एफएंडओ में निवेश के साथ ही बढ़े खतरे, नए नियम लाने की तैयारी में सेबी, होगा ये बदलाव
Updated on
19-06-2024 01:40 PM
नई दिल्ली: फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग यानी वायदा और विकल्प ट्रेडिंग को लेकर सेबी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निवेशकों को सचेत किया था। लेकिन इसे बावजूद खुदरा निवेशकों की इसमें रुचि बढ़ रही है। लिहाजा, इससे जुड़े खतरों से निपटने के लिए सेबी डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियमों में कई बदलावों पर विचार किया जा रहा है। डेरिवेटिव एक फॉर्मल फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट है जो निवेशक को भविष्य की तिथि के लिए एसेट खरीदने और बेचने की अनुमति देता है। डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की समाप्ति तिथि पहले से निर्धारित की जाती है। खुदरा निवेशकों के दम पर इंडेक्स और स्टॉक ऑप्शंस की ट्रेडिंग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। इसे देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि एफएंडओ में रिटेल ट्रेडिंग में उछाल से आगे कई चुनौतियां आ सकती हैं जो मार्केट के साथ ही निवेशकों के सेटिमेंट और परिवारों के फाइनेंस को लेकर भी हो सकती है।
अब सेबी नए नियमों पर विचार कर रहा है, जिससे खतरे कम रहें। सूत्रों के मुताबिक, सेबी इंडेक्स और स्टॉफ ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर खुलासे के लिए भी कह सकता है, जबकि अभी सिर्फ ऑप्शंस एक्टिविटी और ओपन इंट्रेस्ट पर खुलासा होता है। सेबी एक्सचेंजों को टर्नओवर पर चार्ज लगाने की बजाए फ्लैट फीस लेने के लिए भी कह सकता है।
क्या है एफएंडओ ट्रेडिंग
एफएंडओ ट्रेडिंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें निवेशक को सहूलियत मिलती हे कि वह कम पूंजी के साथ किसी स्टॉफ, कमोडिटी, करेंसी में बड़ी पोजिशन ले सकता है। इस तरह की ट्रेडिंग में ज्यादा खतरा होता है। ज्यादातर निवेशक अपना सबकुछ डुबो देते हैं। सेबी की एक स्टडी से पता चला है कि 10 में से 9 खुदरा निवेशकों को एफएंडओ मार्केट में अपने लगाए दांव पर नुकसान होता है।
आरबीआई भी निगरानी कर रहा
आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास ने भी मंगलवार को एफएंडओ को लेकर सख्ती का संकेत दिया है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि रिजर्व बैंक सेबी के साथ मिलकर एफएंडओ में हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम पर नजर रख रहा है। हालांकि इसपर कोई भी कार्रवाई मार्केट रेगुलेटर सेबी द्वारा ही की जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक के पॉलिसी रुख में कब बदलाव होगा, इसको लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा करना बहुत जल्दबाजी होगा। वहीं सेंट्रल बैंक को दरों के मोर्चे पर धैर्य दिखाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी संभावना है कि मार्च तिमाही के लिए करंट अकाउंट डेफिसिट वित्त वर्ष 2023-24 के पहले नौ महीनों के लिए 1.2 फीसदी के आंकड़े से नीचे आ जाएगा।
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