रूस, भारत और चीन... अमेरिका के खिलाफ नया गठबंधन बनाना चाहते हैं पुतिन, क्या मोदी मिलाएंगे हाथ?
Updated on
06-04-2023 06:31 PM
मॉस्को: चीन और भारत, एक दूसरे के दुश्मन तो वहीं इन दोनों देशों के साथ रूस के रिश्ते काफी अच्छे हैं। पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब रूस की यात्रा पर गए तो कुछ लोगों ने आशंका जताई कि भारत के साथ इस पुराने दोस्त के समीकरण बिगड़ सकते हैं। लेकिन वहीं कुछ लोगों ने इससे अलग ही बात कही। रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोले पेत्रुशेव ने हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इस मीटिंग में उन्होंने पीएम मोदी के साथ आपसी हितों के लिए द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की है। विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिमी देशों ने इस मुलाकात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है। लेकिन यह मीटिंग कई मायनों में महत्वपूर्ण है। निकोल ने शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) से अलग पीएम मोदी से प्राइवेट मीटिंग की थी। भारत और चीन पर निर्भर रूस इस मीटिंग के बारे में ज्यादा जानकारियां साझा नहीं की गई है लेकिन सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी के साथ मुलाकात करना मुश्किल है। ऐसे में साफ है कि जो भी बात हुई होगी वह काफी महत्वपूर्ण रही होगी। साल 2022 में जब से यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ है तब से ही रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से भारत और चीन के साथ होने वाले व्यापार पर निर्भर है।
पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए प्रतिबंधों की वजह से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए यह जरूरी था कि एक समांतार अर्थव्यवस्था तैयार की जाए जो डॉलर पर निर्भर न हो और संबंधों को भी मजबूत बना कर रखे। यूक्रेन पर हमले के बाद चीनी युआन में रूस का व्यापार काफी तेजी से बढ़ा। आंकड़ों के मुताबिक इसमें असाधारण तौर पर 80 गुना तक इजाफा हुआ है।
युआन बना पुतिन की पसंद पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक बैठक में, पुतिन ने युआन को अपनी पसंद की मुद्रा बताया और युआन पर भरोसा लंबे समय तक भरोसा करने की योजना के बारे में बताया। पुतिन ने कहा था, 'हम रूस और एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के बीच चीनी युआन के प्रयोग को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जो प्लान रूस ने बनाया है उसमें भारत को कभी न कभी शामिल करना होगा। यूक्रेन जंग के बाद भारत ने रूस के साथ ऑयल डील की और इस बार रूस से तेल का आयात तेजी से बढ़ा। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में तेल का व्यापार 400 फीसदी तक बढ़ गया है। रूस अब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है और इसमें इजाफा जारी है।
रूस की नई विदेश नीति दिलचस्प बात है कि सुरक्षा परिषद के सचिव पेत्रुशेव के साथ रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के अध्यक्ष भी पीएम मोदी से मुलाकात के लिए पहुंचे थे। उन्होंने तेल सप्लाई बढ़ाने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन सबके ही बीच भारत में एक अलग मीटिंग में रूस की संसद ड्यूमा के उपाध्यक्ष ने भारत, चीन और रूस के नेतृत्व में एक आम डिजिटल मुद्रा जारी की है। वहीं, रूस ने अपनी जो नई विदेश नीति जारी की है उसमें भारत और चीन को अपना सबसे करीबी सहयोगी करार दिया गया है। रूस के सामने बड़ी चुनौती रूस के लिए यह सब काफी आसान लगता है लेकिन भारत के लिए यह थोड़ा जटिल होगा। पुतिन के सामने जो बड़ी समस्या आएगी वह है कि भारत अभी भी चीन को शक की नजर से देखता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबी झड़पों के कारण, भारत को चीन पर जरा भी भरोसा नहीं करता है। ऐसे में इस बात की संभावना भी बहुत कम है कि भारत सरकार डॉलर से मुक्त समानांतर अर्थव्यवस्था बनाने के लिए चीन का साथ देने को तैयार होगी। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत भी अब डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देना चाहता है। लेकिन देखना होगा कि पुतिन की रणनीति में भारत कितना साथ देगा।
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