क्या बोली टीएमसी और बीजेपी
तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि जो लोग मांसाहारी भोजन नहीं खाते, वे इसे न खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन विक्रेता पर हमला क्यों? वे वहां विभिन्न वस्तुएं बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं। यह अस्वीकार्य है। बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि गीता पढ़ने वालों को इसका मूल संदेश समझना चाहिए। गीता क्या कहती है? यह सभी के साथ आगे बढ़ने और सभी से प्रेम करने का संदेश देती है। एक तरफ गीता का पाठ हो रहा है, तो दूसरी तरफ एक गरीब व्यक्ति पर हमला किया जा रहा है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए चिकन पैटी बेच रहा है। भाजपा की लॉकेट चटर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब एक साजिश है। भाजपा का इस घटना से कोई संबंध नहीं है।हाई कोर्ट पहुंचा मामला
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि कुछ लोगों को शक हुआ कि दोनों मुस्लिम शख्स चिकन पैटीज बेच रहा है, इसके बाद भीड़ बेकाबू हो गई और उस पर हमला कर दिया। पूरी घटना का परेशान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मारपीट के अगले ही दिन वकील और सीपीआईएम नेता सायन बनर्जी ने मैदान थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। साथ ही उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी। याचिका में कहा गया है कि शहर के बीचों-बीच इतनी बड़ी भीड़ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पुलिस अब तक खामोश है और कोई केस तक दर्ज नहीं किया गया।याचिका में सायन बनर्जी ने लिखा है कि गरीब और असंगठित क्षेत्र का यह विक्रेता पूरी तरह असहाय था। भीड़ ने बिना किसी सबूत या उकसावे के उसकी आजीविका छीन ली। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तहसीन पूनावाला मामले का हवाला देते हुए कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा और हत्या पर सख्त दिशानिर्देश पहले से मौजूद हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस उन्हें लागू करने में नाकाम रही है।
वकील ने कोर्ट से मांग की है कि हाईकोर्ट खुद इस मामले का संज्ञान ले, राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब करे, सुप्रीम कोर्ट के लिंचिंग रोकने के दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने का आदेश दे, पीड़ित को उचित मुआवजा दिलवाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। वहीं, लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन के नाम पर अगर कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में ले सकता है, तो लोग सुरक्षित कैसे रहेंगे? सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई करने वाला है।
