ईरान के खिलाफ युद्ध में सऊदी अरब की एंट्री तय, UAE भी ऐक्शन में, मुस्लिम उम्मा नहीं इजरायल का देंगे साथ!
Updated on
24-03-2026 01:09 PM
तेहरान/रियाद: ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यह कदम संभवतः लड़ाई के और तेज होने का संकेत माना जा रहा है। WSJ ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को अपने 'किंग फहद एयर बेस' इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है।
ईरान युद्ध को लेकर खाड़ी के दो सबसे ताकतवर देशों का ये बहुत बड़ा यूटर्न है। सऊदी अरब ने इससे पहले साफ शब्दों में कहा था कि वो अपने बेस का इस्तेमाल अपने पुराने दुश्मन पर हमला करने के लिए नहीं करने देगा। सऊदी अरब ने पहले कहा था कि वो ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा लेकिन अब वो अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध में शामिल होने के लिए कदम बढ़ा चुका है।
ईरान युद्ध में शामिल होने के काफी करीब सऊदी अरब
दूसरी तरफ अमेरिकी अखबार ने यह भी बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के स्वामित्व वाले एक अस्पताल और एक क्लब को बंद कर दिया है। यह कदम तेहरान के लिए समर्थन के एक प्रमुख स्रोत को कमजोर करने वाला माना जा रहा है। WSJ ने कहा कि कुछ वीडियो से ऐसा महसूस हो रहा है कि ईरान पर किए गए हमलों में इस्तेमाल की गई कुछ मिसाइलें बहरीन से दागी गई थीं। अखबार ने यह भी बताया है कि अमेरिकी सेना ने इस बात पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि उसे इस क्षेत्र के अन्य देशों से कोई मदद मिल रही है या नहीं। WSJ की रिपोर्ट आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी देखी गई है जबकि अमेरिकी स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स ने अपनी बढ़त गंवा दी।
मिडिल ईस्ट के दो ताकतवर देशों ने जिस तरह से कदम उठाए हैं उससे पता चलता है कि ईरान के लगातार हमलों ने उन्हें युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर कर दिया है। ईरान को लेकर उनका धैर्य टूट रहा है। सऊदी के रक्षा मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि ईरान को लेकर सऊदी का धैर्य अब खत्म हो रहा है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब देते हुए कई पड़ोसी देशों में स्थित ठिकानों को निशाना बनाया है। पिछले सप्ताह इजरायल ने ईरान के एक गैस क्षेत्र पर हमला किया था जिसके बाद ईरान ने पूरे मध्य-पूर्व में ऊर्जा संपत्तियों पर जवाबी हमले किए थे। इसके बाद ट्रंप ने इजरायल को फटकार लगाई थी।
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम पर बातचीत?
डोनाल्ड ट्रंप ने कल कहा था कि वो ईरान के ऊर्जा स्थलों पर हमले अगले पांच दिनों के लिए टाल रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच 'सकारात्मक बातचीत' चल रही है। हालांकि उन्होंने बातचीत में शामिल लोगों या संभावित शर्तों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है। Axios ने सोमवार को रिपोर्ट दी है कि डोनाल्ड ट्रंप के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाघेर ग़ालिबफ़ के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही है। लेकिन ग़ालिबफ़ ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा है कि अमेरिका के साथ उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है।ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया है कि हाल के दिनों में अमेरिका ने मध्यस्थों के जरिए ईरान के साथ बातचीत करने की कोशिश की थी लेकिन तेहरान सरकार ने उन अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया। ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। जहां तक बात स्टीव विटकॉफ के युद्धविराम को लेकर होने वाली बातचीत में शामिल होने को लेकर है तो वो युद्ध से पहले भी ईरान से होने वाली बातचीत में शामिल थे। जब अचानक अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया था। तो क्या स्टीव विटकॉफ पर ईरान विश्वास करेगा? ये एक बड़ा सवाल है।
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