'सऊदी प्रिंस MBS इजरायल को मान्यता देने को तैयार लेकिन अब्बाजान बने दीवार', ट्रंप के सहयोगी का बड़ा बयान
Updated on
26-05-2026 12:56 PM
रियाद: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) कथित तौर पर इजरायल को मान्यता देने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सहयोगी माइक इवांस ने दावा किया है कि MBS ने निजी बातचीत में अब्राहम अकॉर्ड में आने की ख्वाहिश जताई है लेकिन वह अपने पिता की वजह से ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। इवांस का दावा ऐसे समय आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब से अब्राहम अकॉर्ड साइन करने और इजरायल को मान्यता देने के लिए कहा है। सऊदी अरब का आधिकारिक रुख फिलीस्तीन मुद्दे के हल नहीं होने तक इजरायल को मान्यता नहीं देने का है।
इजरायली वेबसाइट यरूशलम पोस्ट के मुताबिक, माइक इवांस ने बताया है कि अगर उनके पिता सऊदी किंग सलमान की ओर से बाधा ना डाली जाए तो MBS आज ही इजरायल को मान्यता देने को तैयार हैं। इवांस ने कहा, 'जब मैंने क्राउन प्रिंस से बात की तो उन्होंने मुझसे कहा कि वह इजरायल को मान्यता दे देंगे लेकिन मेरे पिता इसमें अड़चन हैं।'
MBS से मैंने दो घंटे बात की: इवांस
फ्रेंड्स ऑफ जायोन के संस्थापक और इजरायल के लंबे समय से इवेंजेलिकल समर्थक रहे इवांस ने बताया कि उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ दो घंटे तक मुलाकात की। इसमें MBS के भाई और सऊदी विदेश मंत्री भी मौजूद थे। क्राउन प्रिंस के भाई ने भी इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में अपना विचार व्यक्त किया।
इवांस ने यह दावा भी किया कि MBS ने यरुशलम को दो राजधानियों में बांटने के विचार को खारिज किया है। इवांस का कहना है कि MBS यहूदी आबादी के एक बड़े हिस्से की तुलना में ज्यादा इजरायल-समर्थक लग रहे थे। उन्हें इस बात पर यकीन नहीं था कि फिलिस्तीनी राष्ट्र का दर्जा सऊदी मान्यता में असली रुकावट है।
'अब्राहम अकॉर्ड पर ट्रंप गंभीर'
इवांस ने डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अब्राहम अकॉर्ड के विस्तार की मांग को अच्छी पहल कहा है। उन्होंने कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप के पास इस समय सऊदी अरब के साथ बातचीत करने का बहुत बड़ा प्रभाव है। ट्रंप के निजी रिश्ते और कूटनीतिक प्रभाव नतीजे दे सकते हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि ट्रंप इन देशों को शांति की ओर बढ़ना चाहते हैं।इवांस की ये टिप्पणियां ऐसे समय सामने आईं हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को अरब और मुस्लिम देशों के अब्राहम समझौते में शामिल होने के व्यापक प्रयास से जोड़ने की पहल की है। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान, मिस्र और सऊदी अरब जैसे देशों को कहा है कि वह अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हों जाएं।
अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्थता से साल 2020 में शुरू हुए समझौते हैं। इनका उद्देश्य इजरायल और अरब के मुस्लिम देशों के बीच संबंध सामान्य बनाना है। इस पर सबसे पहले सितंबर, 2020 में यूएई और बहरीन ने दस्तखत किए थे। इसके बाद मोरक्को, सूडान और कजाकिस्तान इसका हिस्सा बन चुका है। डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश सऊदी अरब जैसे देशों को इसमें लाने की है।
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