- समुद्र के जलस्तर के बढ़ने से तूफानों की तेजी बढ़ेगी। समंदर में उठने वाले ज्वार-भाटा पर भी असर पड़ेगा।
- दुनियाभर के समुद्र पिछले सदी में अनुमान से कहीं तेजी से गर्म हुए हैं। साल 1971 से 2018 के बीच समुद्र के बढ़े जलस्तर में 50% हिस्सेदारी बढ़ते तापमान की रही है।
- जलस्तर में इजाफे में बर्फीली परत के पिघलने का योगदान 20% रहा है। साल 1992-99 और 2010-2019 के बीच बर्फ की परत का पिघलना चार गुना बढ़ा है।
- 21वीं सदी में भी समुद्र का जलस्तर बढ़ना जारी रहेगा। इसमें इजाफा दुनियाभर में एकसमान नहीं है। अलग-अलग जगहों पर समुद्र का जलस्तर अलग-अलग तेजी से उठा है।
- अगर ग्लोबल वॉर्मिंग 1.5 से 2 डिग्री सेल्सियस के बीच भी रहती है तो भी अल्पविकसित और विकासशील देशों में इससे फूड सिक्योरिटी खतरे में पड़ जाएगी।
- समुद्र का खारा पानी शहरी इलाकों में घुसेगा तो खेती, मछली पालन बर्बाद होगा। टूरिजम जैसे उद्योगों में नौकरियां खत्म होंगी।
