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'रामचरितमानस' वाले शिक्षा मंत्री जी देखिए! एक कमरे में चल रहे दो स्कूल, 14 स्कूलों के पास बस एक-एक रूम

Updated on 20-07-2023 01:03 PM
सीतामढ़ी : बिहार में शिक्षा व्यवस्था का हाल (Bihar Education System News) क्या है ये सीतामढ़ी जिले की स्थिति को देखकर समझा जा सकता है। यहां एक बिल्डिंग में चार स्कूल चल रहे तो 14 स्कूलों के पास एक-एक कमरा है। उसी में क्लास चल रही। सोचिए बच्चे कैसे पढ़ रहे। टीचर, कमरे और संसाधनों की कमी से शिक्षण संस्थाओं को अपने उद्देश्य की पूर्ति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार हर महीने जिले के शिक्षकों के वेतन पर करोड़ों रुपये खर्च करती है पर उसका कितना फायदा मिल रहा ये जानना भी जरूरी है। बच्चों को पढ़ाने के बजाय स्कूलों से शिक्षक के नदारद रहने की खबरें बराबर आती है। अब हम बताने जा रहे है शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा रोचक और सनसनीखेज मामला।


एक बिल्डिंग में चार स्कूल

सीतामढ़ी शहर में एक ही बिल्डिंग में चार स्कूल चलते हैं। यह जानकर भले ही आश्चर्य लग रहा होगा, पर है सच। अव्वल तो यह कि इस बिल्डिंग के एक ही कमरे में दो स्कूल संचालित हो रहे। हर किसी को ये अजीब लगेगा कि यह कैसे संभव है, लेकिन ये शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई एक बानगी भर है। आखिर कैसे एक ही बिल्डिंग में चार स्कूल के बच्चे बढ़ते होंगे, यह समझना मुश्किल है। यानी यहां पढ़ाई भगवान भरोसे होती है। मामला शहर स्थित नगरपालिका मध्य विद्यालय का है। इस स्कूल में तीन और स्कूल संचालित हो रहे।

4 स्कूलों के एक ही जगह चलने की पूरी कहानी

इस नगरपालिका स्कूल में प्राइमरी स्कूल नेहरू अनाथालय, प्राइमरी स्कूल वार्ड नंबर- 9 और प्राइमरी स्कूल, नया लाइन संचालित है। खास बात यह कि प्राइमरी स्कूल नेहरू अनाथालय में 82 बच्चे हैं। प्राइमरी स्कूल वार्ड नौ में 70 बच्चे हैं। यह दोनों स्कूल मात्र एक कमरे में चलता है। तीसरा है प्राइमरी स्कूल नया लाइन, जिसमें 153 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है। तीनों की प्रधान शिक्षिका क्रमश: पूनम कुमारी सिंह, अमृत चौधरी और किरण कुमारी ने बताया कि कमरे में बच्चे अधिक होने के बाद नगरपालिका स्कूल में पढ़ने को भेज दिया जाता है। तीनों स्कूल में एक ही टीचर भी हैं।

दो स्कूल भूमिहीन, एमडीएम एक जगह

तीनों स्कूलों की प्रधान शिक्षिका ने बताया कि दो स्कूल भूमिहीन है। यहां चारों स्कूल का एमडीएम एक ही जगह बनता है। इस संबंध में नेहरू अनाथालय की प्रधानचार्य ने बताया, पुराना स्कूल भवन जर्जर हो चुका है। करीब तीन-चार साल पूर्व तत्कालीन डीएम डॉ रणजीत कुमार सिंह ने विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को देखा था। तभी विद्यालय को खाली कराकर नगरपालिका स्कूल में चलाने का आदेश दिया गया था। तब से स्कूल नगरपालिका स्कूल में ही चल रहा है। स्कूल के पुराने जर्जर भवन में कुछ पुलिस वाले रहते हैं। बिल्डिंग पुरानी स्थिति में ही है। नया भवन बनने के बाद ही स्कूल व्यवस्थित हो पाएगा। नया भवन कब बनेगा, भविष्य के गर्त में है।

शहर में एक कमरे वाले हैं 14 स्कूल

डीपीओ सर्वशिक्षा अभियान कार्यालय के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में 19 ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं, जिसमें नामांकित दर्जनों बच्चे और शिक्षक का काम सिर्फ एक ही कमरे चलता है। इन विद्यालयों में नामांकन भी ठीक-ठाक है। वहीं, चार ऐसे विद्यालय भी हैं, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक या शिक्षिका उपलब्ध हैं। खास बात यह कि ये सभी विद्यालय भूमि और भवन के अभाव में अपने मूल विद्यालय से अलग नजदीक के किसी दूसरे विद्यालय में लंबी अवधि से जैसे-तैसे संचालित हो रहे हैं।


इन स्कूलों में पास एक कमरा

जिन विद्यालयों को सिर्फ एक ही कमरा उपलब्ध है, उनमें प्राथमिक विद्यालय भवदेवपुर, प्राथमिक विद्यालय पंचायत भवन, मेहसौल गोट, प्राथमिक विद्यालय रामपट्टी, प्राथमिक विद्यालय कहार टोल, मोहनपुर, प्राथमिक विद्यालय वार्ड नंबर-16, प्राथमिक विद्यालय राइन टोला, प्राथमिक विद्यालय दलित टोला, राजोपट्टी, प्राथमिक विद्याल राजोपट्टी उर्दू कन्या, प्राथमिक विद्यालय प्रतापनगर, प्राथमिक विद्यालय अंसारी टोला, प्राथमिक विद्यालय बड़ी बाजार उर्दू, प्राथमिक विद्यालय भवदेवपुर, वार्ड नंबर-09, प्रावि, नया लाइन, वार्ड नंबर-10 और प्रावि, वार्ड नंबर-17 शामिल हैं। वहीं, जिन विद्यालयों के पास एक ही शिक्षक या शिक्षिका उपलब्ध हैं, उनमें प्राथमिक विद्यालय भवदेवपुर, उर्दू, प्राथमिक विद्यालय कहार टोला, मोहनपुर, प्रावि वार्ड नंबर-16, प्रावि भीसा, वार्ड नंबर-07, प्रावि मेहसौल, वार्ड नंबर-22 शामिल है।

एक बिल्डिंग में चार स्कूल

सीतामढ़ी शहर में एक ही बिल्डिंग में चार स्कूल चलते हैं। यह जानकर भले ही आश्चर्य लग रहा होगा, पर है सच। अव्वल तो यह कि इस बिल्डिंग के एक ही कमरे में दो स्कूल संचालित हो रहे। हर किसी को ये अजीब लगेगा कि यह कैसे संभव है, लेकिन ये शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई एक बानगी भर है। आखिर कैसे एक ही बिल्डिंग में चार स्कूल के बच्चे बढ़ते होंगे, यह समझना मुश्किल है। यानी यहां पढ़ाई भगवान भरोसे होती है। मामला शहर स्थित नगरपालिका मध्य विद्यालय का है। इस स्कूल में तीन और स्कूल संचालित हो रहे।


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