20 साल की उम्र में बेचे मसाले, डूबी कंपनी तो प्रॉपर्टी बेच शुरू किया नया बिजनेस, आज करोड़ों में है नेटवर्थ
Updated on
18-03-2024 12:55 PM
नई दिल्ली: दुनिया में सफल होना सब चाहते हैं लेकिन ज्यादातर लोग असफलता मिलने पर निराश हो जाते हैं। ऐसे लोग बहुत ही कम हैं जो अपनी असफलताओं से सीखते हैं और हार न मानकर सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है मालाबार गोल्ड (Malabar Gold) कंपनी के फाउंडर एमपी अहमद (MP Ahammed) ने। एक समय ऐसा था जब एमपी अहमद मसाले बेचा करते थे। लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। 20 साल तक पहुंचते-पहुंचते एमपी अहमद ने 1979 में मसालों का कारोबार शुरू किया था। केरल के कोझीकोड में उन्होंने काली मिर्च, धनिया और नारियल का बिजनेस शुरू किया था। कुछ दिन तो इस बिजनेस को चलाया, लेकिन जल्द ही उन्हें अहसास हो गया कि यह कारोबार चलने वाला नहीं है। इसके बाद उन्होंने इस बिजनेस को बंद कर दिया और मार्केट रिसर्च करना शुरू किया। आज एमपी अहमद 27 हजार करोड़ रुपये की कंपनी के मालिक हैं। हालांकि ये सफर इतना आसान नहीं था। इसमें उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
बिजनेस के लिए बेच दी प्रॉपर्टी
जब मसालों का बिजनेस नहीं चला तो एमपी अहमद ने बाजार में रिसर्च शुरू की। रिसर्च करने के दौरान अपने जन्मस्थान मालाबार में उन्होंने देखा कि लोग निवेश और उत्सव दोनों ही मौकों के लिए गोल्ड पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। यहीं से एमपी अहमद को ज्वैलरी बिजनेस का आईडिया आया। लेकिन इसे शुरू करने के लिए उनके पास पूंजी नहीं थी। पैसा जुटाने के लिए उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी बेच दी और 50 लाख रुपये जुटाकर बिजनेस की शुरुआत की। एमपी अहमद ने साल 1993 में 400 वर्गफुट की पहली शॉप कोझिकोड में खोली थी। यहीं से मालाबार गोल्ड और डायमंड की शुरुआत हुई।
ऐसे मिली सफलता
एमपी अहमद का मुख्य उद्देश्य लोगों को सही कीमत पर क्वालिटी प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराना था। इसका उन्हें फायदा मिला। एमपी अहमद का बिजनेस चल निकला। वे सोने की ईंट यानी गोल्ड बार खरीदते और खुद ज्वैलरी बनाकर बेचते थे। अहमद ने अपने कारीगरों के जरिये खुद ज्वैलरी बनाने का फैसला किया था। डिजाइन और कलेक्शन ने ग्राहकों को लुभाया और स्टोर चल पड़ा। इसके बाद उन्होंने तिरूर और थेलिचेरी में दो और स्टोर खोले। कोझिकोड में भी उन्होंने पुराना स्टोर बंद करके साल 2015 में 4 हजार वर्गफुट में नया स्टोर खोल दिया। क्वालिटी को बनाए रखने के लिए उन्होंने 1999 में बीआईएस हॉलमार्क वाली ज्वैलरी बेचनी शुरू की। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनका बिजनेस लगातार सफलता की सीढि़यां चढ़ने लगे।
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