कहां खाई मात: फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी लेखनी
है। फिल्म को कागज पर ही लिखते वक्त मेहनत नहीं दिखती है, जिसका खामियाजा
पूरी फिल्म पर दिखता है। फिल्म में कई डायलॉग्स और सीन्स ऐसे हैं, जिनका
कोई तुक नहीं बनता है। बतौर ऑडियंस भी आप खुद को उससे कनेक्ट नहीं कर पाते
हैं। फिल्म को बॉडी शेमिंग के मुद्दे पर प्रमोशन किया जा रहा था, लेकिन ये
तो फिल्म का एक जरा सा हिस्सा दिखता है, जो फिल्म देखकर बाद में जरूरी सा
भी नहीं लगता है। फिल्म का बैक ग्राउंड म्यूजिक, एडिटिंग, सिनेमैटोग्राफी
और डायरेक्शन भी कमजोर है।