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SP MLA पूजा पाल BJP में हो सकती हैं शामिल, इंद्रजीत सरोज को लेकर भी चर्चा क्या अतीक केस के बाद बढ़ी नजदीकी?

Updated on 29-07-2023 01:53 PM
कौशांबी: उत्तर प्रदेश कि राजनीति में इन दिनों उलटफेर का दौर जारी है। लोकसभा चुनाव 2024 के पहले पार्टी अपनी स्थिति को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। पार्टी पूर्वांचल में अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश में मिशन-80 पर काम करती दिखती है। भारतीय जनता पार्टी ने इसको लेकर समाजवादी पार्टी में सेंधमारी शुरू कर दी है। यूपी चुनाव 2022 से पहले जिस प्रकार से समाजवादी पार्टी ने भाजपा के विधायकों को तोड़ा था। पार्टी अब उसी प्रकार के एक्शन में दिख रही है। समाजवादी पार्टी के 2 विधायकों के अभी भाजपा के संपर्क में होने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कौशांबी के चायल से समाजवादी पार्टी विधायक पूजा पाल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकती हैं। वहीं, सपा विधायक इंद्रजीत सरोज को लेकर भी चर्चा है। इन दोनों नेताओं के अलावा सपा के कई विधायकों के भाजपा में शामिल होने की बात कही जा रही है। भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले अपने कुनबे के विस्तार की योजना पर काम कर रही है। इस क्रम में विपक्ष के कद्दावर चेहरों को अपनी तरफ लाने का प्रयास किया जा रहा है।


कौन हैं पूजा पाल

पूजा पाल कौशांबी से समाजवादी पार्टी की विधायक हैं। वह इलाहाबाद के कटघर मोहल्ले में रहता था। यहीं से उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई। 16 जनवरी 2005 को पूजा पाल की राजू पाल के साथ शादी हुई। राजू पाल उस समय इलाहाबाद पश्चिमी से बहुजन समाज पार्टी के विधायक थे। शादी के बाद पूजा अपने ससुराल धूमनगंज के उमरपुर नीवां पहुंची। उनके हाथ की मेहंदी छूटी भी नहीं थी कि शादी के 9 दिन बाद राजू पाल की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। माफिया अतीक अहमद और गैंग का नाम सामने आया। पूजा पाल इस घटना के बाद अतीक अहमद के सामने डटकर खड़ी हो गई। पति के हत्यारों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ती रही। राजनीति में कदम रखा।

2005 के उप चुनाव में बसपा ने उम्मीदवार तो बनाया, लेकिन वह हार गई। 2007 के विधानसभा चुनाव में पहली बार पूजा पाल इलाहाबाद पश्चिमी सीट से जीत दर्ज करने में कामयाब हुई। 2012 में भी पूजा ने इसी सीट से जीत हासिल की। यूपी चुनाव 2017 में इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह खड़े हुए। उन्होंने पूजा पाल को हरा दिया। यूपी चुनाव 2022 में पूजा को सपा ने चायल सीट से उम्मीदवार बनाया। वह जीत दर्ज करने में कामयाब हो गई।

अतीक और अशरफ को हराया

पूजा पाल ने माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ से 2005 में हुए विधानसभा उप चुनाव में हार गई। 2007 के विधानसभा चुनाव में पूजा ने अशरफ को बड़े अंतर से हरा दिया। 2007 के चुनाव में पूजा पाल को 56,198 और अशरफ को 45,876 वोट मिले थे। अशरफ 10,322 वोटों से हार गया। इससे खफा अतीक ने यूपी चुनाव 2012 में खुद इलाहाबाद पश्चिमी से उतरने का निर्णय लिया। सपा के टिकट पर उतरे अतीक को एक बार फिर पूजा ने हराया।

पूजा पाल को 2012 के चुनाव में 71,114 और अतीक अहमद को 62,229 वोट मिले। पूजा ने 8885 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गई। सिद्धार्थनाथ सिंह का सपा के अमरनाथ मौर्य से इस सीट पर मुकाबला हुआ और वे 25,336 वोटों से जीते। 2022 में भी यह सीट सिद्धार्थनाथ सिंह के पास ही रही।

सपा की तरफ गई पूजा

अखिलेश यादव ने प्रयागराज में अतीक अहमद पर शिकंजा कसने के बाद उसे नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। अतीक ने अपनी ताकत दिखाने के लिए बहुजन समाज पार्टी से नजदीकी बढ़ानी शुरू कर दी। वहीं, बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच पूजा पाल भी समाजवादी पार्टी के निकट जाने लगी। मायावती की ओर से अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन को पार्टी में लेने की हरी झंडी दे दी। इस बढ़ती नजदीकी के बीच पूजा पाल ने सपा का दामन थाम लिया। चायल से पार्टी की उम्मीदवार बनी और जीत दर्ज कर लिया।

भाजपा के साथ आने की अब चर्चा

पूजा पाल के भाजपा के साथ आने की चर्चा हो रही है। इसका कारण पाल वोटरों के बीच उनकी पकड़ को माना जा रहा है। इसके अलावा प्रयागराज और आसपास के इलाकों में अतीक अहमद, उसके परिवार और गैंग पर जिस प्रकार से योगी सरकार की ओर से कार्रवाई हुई है, वह भी खासी चर्चा में है। पूजा पाल के पति राजू पाल की हत्या के करीब डेढ़ दशक बाद केस पर तेज गति से जांच की प्रक्रिया बढ़ी है। चचेरे भाई और राजू पाल मर्डर केस के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद से जिस प्रकार योगी सरकार का एक्शन हुआ है, उससे भी इस वर्ग में सरकार के प्रति एक अलग प्रकार का भाव है। ऐसे में पूजा पाल को जोड़कर भाजपा प्रयागराज और आसपास के इलाकों में बड़ा संदेश दे सकती है।

कौन हैं इंद्रजीत सरोज?

इंद्रजीत सरोज समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। कौशांबी के मंझनपुर विधानसभा सीट से वे यूपी चुनाव 2022 में चौथी बार विधायक चुने गए। यूपी चुनाव 2017 में वे भाजपा के लाल बहादुर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद पाला बदल लिया। 1 जनवरी 1963 को कौशांबी के नगरेहा खुर्द पश्चिम शरीरा में जन्म लेने वाले इंद्रजीत सरोज किसान परिवार से आते हैं। उनके जीवन पर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का बड़ा प्रभाव दिखता है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन करने के बाद वे राजनीति में आ गए। कांशीराम से प्रेरित होकर उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा।
मंझनपुर विधानसभा सीट से पहली बार वे 1996 में विधायक चुने गए। बसपा में उनका कद काफी बढ़ गया था। हालांकि, बसपा सु्प्रीमो मायावती से विवाद के बाद उन्होंने 2018 में पार्टी छोड़कर सपा का दामन थाम लिया। सपा ने अभी उन्हें यूपी विधानसभा में उप नेता बनाया है। वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं। उनको लेकर भी राजनीतिक हलकों में अलग चर्चा चल रही है।

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