जीएसटी सुधार से राज्यों को लाभ ही लाभ, केंद्र को 48000 करोड़ का घाटा
Updated on
04-09-2025 03:47 PM
नई दिल्ली: देश में माल एवं सेवा कर या जीएसटी (GST) की शुरुआत एक जुलाई 2017 को हुई थी। तब से अब तक का सबसे बड़ा रिफॉर्म हो गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने तीन सितंबर 2025 को हुई बैठक के दौरान इसमें थोक भाव में रेट कट करने का फैसला ले लिया है। यह फैसला इसी महीने की 22 तारीख से लागू हो रहा है। इस फैसले से राज्य सरकार की झोली में पहले से ज्यादा रकम आएगी। वहीं केंद्र सरकार को साल में करीब 48,000 करोड़ का नुकसान हो जाएगा।
राज्यों को फायदा
जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक के फैसले से जीएसटी रेट (GST Rate Cut) भले ही कम हो गया हो, लेकिन इससे राज्यों को फायदा होगा। राज्यों को कैसे फायदा होगा, इसे ऐसे समझें। GST 2.0 reforms से अब मोटर वाहनों पर कंपनसेशन सेस compensation cess का खात्मा हो गया। किसी वस्तु एवं सेवा पर जो भी सेस वसूला जाता है, वह शत प्रतिशत केंद्र सरकार के पास रह जाता है। उसमें राज्यों को एक पैसे की हिस्सेदारी नहीं मिलती है। हम यहां उदारण के तौर पर बता रहे हैं कि किन वाहनों पर कितना सेस लगता था।
अब क्या हुआ है
मोटर वाहनों पर जो कंपनेशन सेस लगाया जाता था, उसे खत्म कर या तो प्रोडक्ट को सस्ता कर दिया गया है, या फिर उस पर बढ़े हुए दर से जीएसटी लगाया गया है, जो कि 40 फीसदी है। अब इसमें से 20 फीसदी केंद्र सरकार को मिलेगा तो 20 फीसदी राज्यों को भी मिलेगा। मतलब कि अब राज्यों को पहले से ज्यादा जीएसटी में हिस्सेदारी मिलेगी।
राज्यों को जीएसटी में 70 फीसदी मिलेगा?
एसबीआई के एक रिसर्च पेपर में बताया गया है कि किसी राज्य में जीएसटी की वसूली जितनी भी हुई, उसमें तो पहले आधे-आधे का बंटवारा होगा। उसके बाद केंद्र के हिस्से में जो राशि आई, उसमें से भी 41 फीसदी राशि राज्यों वापस दिया devolved back जाएगा। मतलब कि यदि किसी राज्य से 100 रुपये के जीएसटी का कलेक्शन हुआ तो राज्य को करीब 70.5 रुपये की हिस्सेदारी मिलेगी। मतलब कि स्टेट नेट गेनर होगा।
इसी साल 14.1 लाख करोड़ मिलेंगे राज्यों को
इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी साल मतलब कि साल 2025-26 में ही राज्यों को एसजीएसटी के मद में करीब 10 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही डिवॉल्यूशन के मद में 4.1 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। यानी, कुल मिला कर सभी राज्यों को जीएसटी से हिस्सेदारी के रूप में 14.1 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। इस व्यवस्था से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को ज्यादा फायदा होगा क्योंकि इन राज्यों में अन्य राज्यों के मुकाबले कंजप्शन ज्यादा है।
केंद्र सरकार को कितना नुकसान
केंद्रीय वित्त मंत्रालय में रेवेन्यू सेक्रेटरी अविनाश श्रीवास्तव का कहना है कि जीएसटी रेट रेशनलाइजेशन की वजह से केंद्र सरकार को करीब 48 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसकी गणना साल 2023-24 के उपभोग के आंकड़ों पर किया गया है। हालांकि इस साल यदि कंजप्शन पैटर्न में बदलाव होता है तो फिर उसका असर अलग दिखेगा।
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