इलेक्ट्रिक टू-वीलर पर 3 महीने और मिल सकती है सब्सिडी, 31 मार्च को खत्म हो रही डेडलाइन
Updated on
28-03-2026 11:57 AM
नई दिल्ली: केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक टू-वीलर (ई-स्कूटर और बाइक) खरीदने वालों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। PM e-Drive योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को जून तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, ई-रिक्शा के लिए यह छूट अगले दो साल (मार्च 2028) तक जारी रह सकती है। इस योजना की समय-सीमा 31 मार्च को खत्म हो रही थी।
एक अधिकारी ने TOI को बताया कि सब्सिडी की अवधि बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। हमारे पास इसके लिए अभी बजट बचा हुआ है। इसलिए हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस स्कीम का फायदा उठा सकें। इस स्कीम के तहत ई-टू-वीलर और ई-रिक्शा खरीदने वालों को प्रति किलोवाट (kWh) के हिसाब से 2,500 रुपये की सब्सिडी मिलती है।
क्या है समस्या?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक टू-वीलर के लिए तय किए गए 1,772 करोड़ रुपये के बजट में से अब तक करीब 1,260 करोड़ रुपये का इस्तेमाल हो चुका है। इसी तरह इलेक्ट्रिक थ्री-वीलर (ई-रिक्शा आदि) के लिए तय 907 करोड़ रुपये में से 737 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ई-रिक्शा बनाने वाली कंपनियों के लिए सरकार के 'लोकल पार्ट्स' वाले नियमों को मानना मुश्किल हो रहा है। ई-रिक्शा में लगने वाली मोटर, बैटरी पैक और इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जैसी अहम चीजें अब भी बड़े पैमाने पर बाहर से मंगवाई जा रही हैं। इस वजह से बहुत सी कंपनियां सब्सिडी की हकदार नहीं बन पा रही हैं और इसी कारण बजट का पूरा पैसा खर्च नहीं हो पाया है।
योजना का मकसद
10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव स्कीम का मकसद देश में ईवी अडॉप्शन को बढ़ावा देना और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना है। इसमें खरीदार को अपफ्रंट प्राइस में कमी के तौर पर इंसेटिंव दिया जाता है और बाद में इसे मैन्युफैक्चरर को रिइंबर्स किया जाता है। इस स्कीम को मार्च 2026 से मार्च 2028 तक के बढ़ाया गया है ताकि इलेक्ट्रिक बसों, ट्रकों और एंबुलेंसेज के एडॉप्शन को सपोर्ट किया जा सके।
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