तालिबान को क्यों आई महिलाओं की याद
वहीं, हक्कानी और याकूब का कहना है कि अफगानिस्तान को अभी अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत है। ऐसे में तालिबान सरकार को महिलाओं की शिक्षा पर लगे प्रतिबंध को हटाना चाहिए। इससे विदेशों का ध्यान अफगानिस्तान की तरफ आकृष्ट होगा और उन्हें मदद मिल सकेगी। ऐसे में तालिबान के एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि अखुंदजादा कोई तार्किक कारण नहीं दे रहे हैं। ऐसे में तालिबान के उच्च अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सर्वोच्च नेता को कैसे पद से बेदखल किया जाए।
महिलाओं के खिलाफ लगातार प्रतिबंध लगा रहा तालिबान
हक्कानी और याकूब अतीत को भुलाकर तालिबान का उदारवादी चेहरा दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं। ऐसे में वे सरकार की तरफ से विदेशी शक्तियों के साथ तालमेल का प्रयास कर रहे हैं। हाल में ही तालिबान ने अफगानिस्तान में गैर सरकारी संगठनों में काम करने वाली महिलाओं पर प्रतिबंध लगाया है। तालिबान का तर्क है कि ये महिलाएं कार्यस्थल पर इस्लामी कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं। ऐसे में अफगानिस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर महिला आबादी को मिलने वाली सहायता लगभग बंद हो गई है।
