'न दिल्ली, न पिंडी' कहने वाले तारिक रहमान की ढाका में ताजपोशी तय, बांग्लादेश-पाकिस्तान के कैसे होंगे रिश्ते
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13-02-2026 12:50 PM
ढाका: बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है। हालांकि, अभी पूरी तरह से नतीजे सामने नहीं आए हैं, लेकिन अनऑफिशियल नतीजों से पता चलता है कि पार्टी ने 151 का पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इस जीत के साथ ही तारिक रहमान ने नेता के तौर पर पहली बार असली सफलता का स्वाद चख लिया है। अब उनका प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है। 60 साल के तारिक रहमान 17 साल के स्वनिर्वासन के बाद बीती 25 दिसम्बर को लंदन से वापस लौटे हैं। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार उन्हें जल्द सत्ता ट्रांसफर कर सकती है। इसके साथ ही ये सवाल उठ रहा है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश के पाकिस्तान के साथ कैसे रिश्ते होंगे।
करीब 18 महीने पहले अगस्त 2024 में जब शेख हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार ने पाकिस्तान के लिए दरवाजे खोल दिए थे। इस दौरान दोनों देशों के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों ने एक दूसरे के देशों का दौरा किया। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से फाइटर जेट और दूसरे सैन्य उपकरण खरीदने की इच्छा जाहिर की है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच 1971 के बाद समुद्र के रास्ते सीधा व्यापार शुरू हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तारिक रहमान भी उसी राह पर चलेंगे?
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और मिलिट्री लीडर जनरल जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। 2001 के दशक में जब आखिरी बार बीएनपी सत्ता में आई, तब उन्हें पैरेलल पावर सेंटर कहा जाता था। कहा जाता है कि उन्होंने कैबिनेट नियुक्तियां और सरकारी ठेके उनकी मर्जी से मिलते थे। विकिलीक्स से रिलीज अमेरिकी डिप्लोमैटिक केबल में उन्हें डार्क प्रिंस कहा गया। इसमें रहमान को बांग्लादेश की राजनीतिक हिंसा में संलिप्तता बताई गई थी।
रहमान की विदेश नीति क्या होगी?
बीएनपी नेता ने जनवरी में सिलहट में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए बांग्लादेश को सबसे पहले रखने की बात कही थी। उन्होंने रैली के दौरान नारा दिया, 'न दिल्ली, न पिंडी (पाकिस्तान), सबसे पहले बांग्लादेश।' इस दौरान रहमान ने 1971 में पाकिस्तान का साथ देने के लिए जमात-ए-इस्लामी पर भी निशाना साधा था। तारिक रहमान ने चुनाव अभियान के दौरान विदेश नीति पर अपना रुख साफ किया है
पाकिस्तान के लिए क्या हैं BNP की जीत के मायने?
पाकिस्तान के लिए रहमान की वापसी एक मिला-जुला मौका है। पार्टी का पाकिस्तान के साथ पुराना रिश्ता रहा है और पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी के साथ पूर्व में गठबंधन सरकार भी चला चुकी है। लेकिन रहमान का 'न दिल्ली, न पिंडी... सबसे पहले बांग्लादेश' वाला रवैया उनकी एक नेशलिस्ट और संतुलित विदेश नीति का संकेत है, जो पाकिस्तान के असर को कम कर सकता है। इसके अलावा अब जमात-ए-इस्लामी साथी के बजाय दुश्मन है। ऐसे में बीएनपी अब पाकिस्तान के साथ सावधानी बरतते हुए संबंध रख सकती है।
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