आज ही जन्मा था तेलंगाना, क्या है राज्य बनने की पूरी कहानी
Updated on
02-06-2023 08:09 PM
हैदराबाद: तेलंगाना के इतिहास में दो जून की तारीख हमेशा के लिए याद रखी जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि आज ही के दिन तेलंगाना का जन्म भारत के 29वें राज्य के तौर पर हुआ था। तेलंगाना के अलग राज्य बनने की लड़ाई इतनी आसान न थी। आंध्र प्रदेश से अलग हुए तेलंगाना राज्य की आज 9वीं सालगिरह है। हालांकि इतने कम सालों में राज्य के तौर पर तेलंगाना ने वाकई देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। तेलंगाना 18वीं शताब्दी में हैदराबाद रियासत का हिस्सा हुआ करता था और यहां पर निजाम का शासन चलता था। हालांकि अंग्रेजों का शासन आने के बाद तटीय आंध्र में आने वाले तेलंगाना का विलय मद्रास में करवा दिया गया था। मद्रास से अलग होने के बाद आंध्र प्रदेश और फिर अलग तेलंगाना बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है।
केसीआर रहे आंध्र से अलग तेलंगाना के फैक्टर
केसीआर का पूरा नाम कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव है। उनका जन्म 17 फरवरी, 1954 को हुआ था। केसीआर तेलंगाना के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। इसके साथ ही वे Bharat Rashtra Samithi के प्रमुख भी हैं। केसीआर तेलंगाना के मेदक जिले के गजवेल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। माना जाता है कि आंध्र से अलग तेलंगाना राज्य की लड़ाई के लिए केसीआर ने बड़ी भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि केसीआर की दीवानगी आज भी उनके समर्थकों में बढ़-चढ़कर बोलती है।
'तेलंगाना' नाम क्यों पड़ा?
तेलंगाना का जो मुख्य अर्थ है वह माना जाता है तेलुगु भाषियों की भूमि। इस बात को भी लेकर जानना जरूरी है कि आखिरकार राज्य का नाम तेलंगाना ही क्यों पड़ा? माना जाता है कि साक्षात भगवान शिव इस जगह पर तीन पर्वतों पर लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इन पर्वतों में मल्लिकार्जुन, द्राक्षाराम और कालेश्वरम, शामिल है। यह पूरा क्षेत्र इन्ही पर्वतों की सीमा के बीच बसा है। इसीलिए इस विशेष क्षेत्र को त्रिलिंग देश भी कहा गया। यहां की भाषा इसी आधार पर तेलुगु कहलाई। यही वजह थी रही कि धीरे-धीरे बदलते दौर में राज्य का नाम तेलंगाना पड़ गया है।
तेलंगाना के लिए हुआ आंदोलन
साल 1956 में तेलंगाना को आंध्र प्रदेश राज्य में विलय कर दिया गया था, जिसके बाद इसे अलग राज्य बनाए जाने के लिए आंदोलन हुआ। तब कहीं जाकर दशकों की लड़ाई के बाद दो जून, 2014 को तेलंगाना को राज्य के रूप में एक अलग पहचान मिल पाई। हैदराबाद में निजामों का राज था और उनके नुमाइंदे तेलंगाना के किसानों से जबरन कर वसूला करते थे। यह एक तरीके का किसानों के खिलाफ दमन था, जिसे कम्युनिस्टों का साथ मिलने के बाद बड़े किसान विद्रोह के रूप में देखा गया।
निजामों से ऐसे मिली आजादी
भारतीय सेना ने 13 सितंबर, 1948 को राज्य में प्रवेश किया। पुलिस, रजाकार दस्ते और निजाम सभी ने एक हफ्ते के अंदर हार मान ली। सरकारी सेना ने किसानों का समर्थन हासिल करने के प्रयास में जागीर उन्मूलन नियम (अगस्त 1949) जारी किया और व्यापक भूमि सुधार कानून के लिए कार्रवाई करने के लिए एक कृषि जांच समिति की स्थापना की।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन में हजारों लोग पहुंचे, कहीं किसी ने डिजिटल क्रांति से आंदोलन का रुख मोड़ा तो किसी ने भूखे रहकर लेकिन उन्हीं के बीच…
नई दिल्ली: भारत में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) उन कानूनों में से एक है जो हर कुछ सालों में चर्चा का विषय बन जाता है। लेकिन क्यों? इस कानून…
नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आंदोलन जारी रहा। आखिरकार 25 जुलाई को सरकार झुकी…
नई दिल्ली, लोकसभा में दोपहर 2 बजे से पेपर लीक से जुड़े 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हो गई है। इस विधेयक में 2024…
कोयंबटूर: तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार ने मेकेदातु बांध को लेकर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है। सरकार का कहना है कि कर्नाटक को प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वॉयर प्रोजेक्ट पर…
इंदौर: चंदन नगर थाना में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक को दुष्कर्म के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोप है कि पुलिसकर्मी ने सीएम हेल्पलाइन पर…
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक स्कूल की शिक्षिका की अमानवीयता का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच साल के मासूम के पैंट में पेशाब करना शिक्षिका…