इधर रबिंदर सिंह ने अमेरिका की मदद से ऐसा माहौल बना दिया कि तबीयत खराब है और वह घर में ही है। वह एक दिन अचानक दिल्ली से निकल गए। अफवाह फैलाई गई कि वह चेन्नई की तरफ गए हैं। एजेंसी का अटेंशन दक्षिण भारत की तरफ डायवर्ट हुआ जबकि रबिंदर यूपी बॉर्डर से होकर नेपाल के लिए रवाना हो गए। आमतौर पर सबसे कम चेकिंग रोड के रास्ते पर होती है। पूरे परिवार के लिए रबिंदर ने नकली पहचान पत्र, अमेरिकी नागरिकता का इंतजाम कर लिया था। ऐसे में नेपाल में उन्हें किसी ने अमेरिका जाने से नहीं रोका। प्लेन के उड़ने के बाद नेपाल को सूचना मिली। कुछ देर पहले तक वह अमेरिकी दूतावास के अधिकारी के साथ काठमांडू में ही थे।
रबिंदर सिंह के खिलाफ यह नहीं पता चल सका था कि वह किस तरह से जानकारी बाहर भेज रहे थे। वह अमृतसर के एक जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। वह भारतीय सेना में अधिकारी थे। ऑपरेशन ब्लूस्टार में हिस्सा भी लिया था। बाद में रॉ में शामिल हो गए। समझा जाता है कि 90 के दशक में हॉलैंड में भारतीय दूतावास में काउंसलर पद पर काम करते हुए रबिंदर अमेरिकी एजेंसी सीआईए के संपर्क में आए थे। बाद में पता चला कि रबिंदर ऑफिस से गुप्त रिपोर्टों को घर ले जाते थे और अमेरिकी एजेंसी से मिले हाई पावर कैमरों से तस्वीरें खींच लेते थे। एक हार्ड डिस्क में उसे स्टोर करते और सिक्योर मेल से हैंडलर को भेज देते थे। बाद में हार्ड डिस्क और लैपटॉप से फाइलें मिटा दी जाती। बताते हैं कि करीब 20 हजार कागजों को उसने इसी तरह भेजा था। अमेरिकी एजेंसी के एजेंटों से मुलाकात करने के लिए वह कई बार काठमांडू जाया करते थे।
जून 2004 में राष्ट्रपति ने रबिंदर सिंह को बर्खास्त करने का आदेश दिया लेकिन तब तक वह बचकर भाग चुका था। बताते हैं कि रबिंदर का आखिरी समय बहुत बुरा गुजरा। सीआईए ने भी उससे दूरी बना ली और वह पैसे के लिए मोहताज हो गए। एक सड़क हादसे में इस डबल एजेंट की मौत हो गई। (फोटो- lexica AI)
