बजट का असर ड्राई फ्रूट्स की कीमत पर भी, जानिए क्यों महंगे हो रहे हैं काजू-बादाम
Updated on
26-07-2024 01:51 PM
नई दिल्ली : इन दिनों डॉलर के मुकाबले रुपया रिकार्ड लो स्तर पर है। कल ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपना रुपया गिरावट के साथ 63.72 रुपये पर बंद हुआ। इसका असर अन्य चीजों के अलावा ड्राई फ्रूट्स पर भी दिख रहा है। इस समय बाजार में काजू, किशमिश, बादाम, अखरोट, सभी के दाम भी बढ़ गए हैं। इसकी वजह से आने वाले दिनों में मिठाइयों के दाम बढ़ने के आसार हैं। जिससे त्योहारी सीजन में लोगों की जेब ढीली हो सकती है।
इन ड्राई फ्रूट्स के पीछे महंगा डॉलर
कारोबारियों के मुताबिक, विदेशी करंसी रुपया के मुकाबले महंगी हुई है। इसके अलावा ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई प्रभावित होने के चलते इनके दाम में तेजी आई है। उल्लेखनीय है दिल्ली के थोक ड्राई फ्रूट्स मार्केट खारी बावली में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों से ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई होती है।
काजू की बढ़ गई है डिमांड
एक कारोबारी ने बताया कि बीते 20 दिनों से काजू के साथ बादाम की डिमांड बढ़ गई है। सबसे ज्यादा डिमांड चार टुकड़े काजू की है। इसका इस्तेमाल मिठाइयों में किया जाता है। क्योंकि त्योहारी सीजन अब शुरू होने वाला है। बड़ी-बड़ी कंपनियों जो मिठाई बनाती हैं, उन्होंने खरीदारी शुरू कर दी है। इसकी वजह से काजू के दाम में बढ़ोतरी हुई है।
दक्षिण अफ्रीका से आता है काजू
दिल्ली किराना कमिटी के अध्यक्ष नंद किशोर बंसल ने बताया कि काजू की सप्लाई सबसे ज्यादा दक्षिण अफ्रीका से होती है। लेकिन कुछ दिनों से सप्लाई प्रभावित होने के चलते रॉ मटीरियल की कमी आई, जिससे काजू के दाम में बढ़ोतरी हुई है। ईरानी मामरा बादाम के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे का कारण वहां करंसी में हुआ उतार-चढ़ाव है।
बाजार में क्या है भाव
रिटेल कारोबारी प्रवीन गोयल ने बताया कि इन बीते 20 दिन में 1,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाली काजू की कीमत 1,200 रुपये किलो हो गई है। ईरानी मामरा बादाम जो पहले 2,000 रुपये प्रति किलो बिकता था, उसकी कीमत अब 2,600 रुपये तक पहुंच गई है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में ड्राई फ्रूट्स के दाम में और तेजी आ सकती है।
रुपया कहां है
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया एक पैसे कमजोर होकर 83.72 (अस्थायी) के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया। विदेशी बाजार में अमेरिकी मुद्रा की मांग और भारत से विदेशी पूंजी की भारी निकासी के कारण यह गिरावट आई। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक घरेलू मुद्रा में यह गिरावट भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के बाद आई है। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा बजट में पूंजीगत लाभ पर कर की दर बढ़ाने की घोषणा के बाद शेयर बाजार नीचे आ रहे हैं।
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