भ्रष्टाचार का दानव प्राइवेट सेक्टर में भी बैठा है, हर विभाग में बैठें हैं रिश्वतखोर: सुमंत रमन
Updated on
18-08-2025 01:11 PM
नई दिल्ली: भारत में जब भ्रष्टाचार ( Corruption ) या रिश्वतखोरी की बात सामने आती है तो लोगों के जेहन में सरकारी बाबू ही आते हैं। लेकिन, इसमें देश का प्राइवेट सेक्टर भी कोई पीछे नहीं है। यह बात एंकर और पॉलिटिकल एनालिस्ट सुमंत रमन (Sumanth Raman) जिनका एक्स हैंडल @sumanthraman है, ने कही है। उन्होंने कहा है कि सरकारी दफ्तरों में भी इतना भ्रष्टाचार नहीं है, जितना प्राइवेट कंपनियों में है।
प्राइवेट सेक्टर के हर विभाग में रिश्वतखोरी!
सुमंत रमन का कहना है कि प्राइवेट कंपनियों के हर डिपार्टमेंट में रिश्वतखोरी और गलत काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "प्राइवेट सेक्टर, खासकर कॉर्पोरेट इंडिया में इतना भ्रष्टाचार है कि सरकारी बाबू भी शर्मा जाएं। ...और इस बारे में बातें भी बहुत कम होती हैं।" उनका कहना है कि प्राइवेट कंपनियों में भ्रष्टाचार सिर्फ कंपनियों द्वारा सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने तक ही सीमित नहीं है। वह लिखते हैं "मैं उन प्राइवेट कंपनियों की बात कर रहा हूं जो अपने साथ डील करने के लिए दूसरी कंपनियों के कर्मचारियों को पैसे देती हैं।"
ये डिपार्टमेंट भ्रष्टाचार में डूबे हुए
सुमंत रमन ने प्राइवेट सेक्टर में खास कर मानव संसाधन विभाग या HR, खरीद करने वाला विभाग या प्रोक्योरमेंट (Procurement), IT और सामान्य प्रशासन यानी एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ बताया है। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश के चरित्र को दिखाता है। उन्होंने आखिर में 'दुखद' कहा।
ये भी सहमत हैं
पूर्व कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव गौतम सरकार भी रमन की बात से सहमत हैं। उन्होंने कहा, "मैं सहमत हूं, भ्रष्टाचार हर जगह फैला हुआ है।" उन्होंने बिजनेस में गलत तरीकों की तुलना हेल्थकेयर से की है। वह लिखते हैं "सोचिए, डॉक्टर लैब टेस्ट/इमेजिंग के लिए रेफर करते हैं, वो भी कमीशन के लिए। यही हाल बड़े अस्पतालों में ICU रेफरल का है, जहां साल के आखिर में बोनस मिलता है। सोचिए, इतना नेक पेशा बदनाम हो रहा है।" प्राइवेट सेक्टर में भ्रष्टाचार की बात ऐसे समय में हो रही है जब देश में सरकारी भ्रष्टाचार को लेकर लोगों में गुस्सा है।
मोहनदास पाई ने भी चिंता जताई
आईटी सेक्टर की कंपनी इंफोसिस के पूर्व CFO मोहनदास पाई ने कर्नाटक में भ्रष्टाचार को लेकर कई बार चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार से इसमें सुधार की मांग की है। इसी साल मार्च में पाई ने लिखा था, "हमने आपको अच्छा शासन देने के लिए चुना है, इस गहरे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के लिए नहीं!" पाई ने लेखिका सागरिका के एक वायरल थ्रेड पर प्रतिक्रिया दी। सागरिका ने बताया था कि बेंगलुरु में छोटे कारोबारियों को मेट्रोलॉजी, लेबर, GST और पुलिस डिपार्टमेंट के अधिकारी लगातार परेशान करते हैं और उनसे पैसे मांगते हैं। उन्होंने लिखा, "सरकार कोई भी हो, उन्हें और उनके आसपास के कारोबारियों को लाखों रुपये रिश्वत देनी पड़ती है।" उन्होंने बताया कि रूटीन इंस्पेक्शन और ऑडिट के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं।
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