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आईएमएफ ने भारत के लिए कुछ कह दिया ऐसा कि ट्रंप का उतर जाएगा पानी, दीवार खड़ी करना भूल जाएंगे

Updated on 27-11-2025 01:47 PM
नई दिल्‍ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत तस्वीर पेश की है। आईएमएफ का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर है। महंगाई काबू में रहने की उम्मीद है। यह भारत की मजबूत घरेलू मांग और महंगाई को अच्छी तरह से संभालने का नतीजा है। आईएमएफ के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। यह ग्रोथ बाहरी फैक्‍टर्स पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय यह देश के अंदरूनी कारणों से हो रही है। बाजार और नीति निर्माता इस अनुमान पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। वे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भारत की लॉन्‍ग टर्म स्‍टेबिलिटी पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे हैं।

भारत के लिए आईएमएफ का यह नजरिया काफी महत्‍वपूर्ण है। खासतौर से ऐसे समय में जब भारतीय सामानों पर अमेरिका ने भारी-भरकम टैरिफ की दीवार खड़ी कर रखी है। भारत 50% टैरिफ झेल रहा है। इसमें से 25% टैरिफ रूसी तेल आयात के कारण लगा है। आईएमएफ का यह कहना कि भारत की ग्रोथ बाहरी फैक्‍टर पर निर्भर नहीं है, साफ दिखता है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था अपने दम पर खड़ी है। यह उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उसके सामने टैरिफ की दीवारें खड़ी करना बेकार है। इससे अमेरिका को ही ज्‍यादा नुकसान होना है।

आगे भी कंट्रोल में रहेंगी कीमतें

आईएमएफ ने कहा है कि खुदरा महंगाई के अच्छी तरह से नियंत्रण में रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में कीमतें स्थिर रहेंगी। यह बात ग्राहकों और व्यवसायों के लिए राहत की खबर है। महंगाई हमेशा से आर्थिक भावना और खर्च करने के पैटर्न को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण फैक्‍टर रही है। महंगाई के नियंत्रण में रहने की उम्मीद को आर्थिक गतिविधियों और निवेश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।आईएमएफ का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6.6 फीसदी बढ़ेगा। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह ग्रोथ थोड़ी कम होकर 6.2 फीसदी हो जाएगी।
आईएमएफ ने स्पष्ट रूप से कहा है, 'भारत की रियल जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में 6.6 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026-27 में 6.2 फीसदी तक कम हो जाएगी।' ये आंकड़े भारत की आर्थिक बुनियाद पर आईएमएफ के भरोसे को दर्शाते हैं। खासकर तब जब देश एक बदलती वैश्विक स्थिति का सामना कर रहा है।

चुनौत‍ियों में भी भारत की रफ्तार कायम

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियों के बावजूद आईएमएफ का मानना है कि भारत की विकास दर मजबूत बनी रहेगी। संगठन ने कहा है, 'बाहरी बाधाओं के बावजूद अनुकूल घरेलू परिस्थितियों के समर्थन से विकास मजबूत बना रहने की उम्मीद है।' यह इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की आर्थिक प्रगति मुख्य रूप से घरेलू खपत, बुनियादी ढांचे में सुधार और नीतियों की निरंतरता पर टिकी है। यह वैश्विक झटकों के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील नहीं है।

हालिया आर्थिक प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्तीय वर्ष में विकास दर में तेजी आई है। आईएमएफ ने बताया है, 'वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 फीसदी की इकोनॉमिक ग्रोथ के बाद वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 फीसदी बढ़ी है।' यह नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में मजबूत रफ्तार का संकेत है। इस तेज ग्रोथ को प्रमुख क्षेत्रों के लचीलेपन और हाल की नीतिगत पहलों की प्रभावशीलता का प्रमाण माना जा रहा है।

अस्थि‍रता से जूझ रही हैं दिग्‍गज अर्थव्‍यवस्‍थाएं

आईएमएफ के ये अनुमान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अधिक अस्थिर वैश्विक माहौल और ऊंची महंगाई की दरों से जूझ रही हैं। ऐसे में भारत की विकास दर को बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने की क्षमता उसे अपने अंतरराष्ट्रीय साथियों से अलग करती है। विकास के मुख्य ड्राइवर के रूप में घरेलू कारकों पर ध्यान केंद्रित करना उभरते बाजारों में देखे जा रहे व्यापक रुझानों के अनुरूप है, जो बाहरी जोखिमों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

यह रिपोर्ट व्यापक आर्थिक माहौल के लिए स्थिर महंगाई के महत्व पर भी प्रकाश डालती है। कीमतों पर नियंत्रण रखकर भारत निवेश और स्थिर रोजगार की अपनी संभावनाओं को बेहतर बनाता है। यह मध्यम वर्ग के विस्तार और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता आगे के वित्तीय और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक मंच प्रदान करती है।

मजबूत स्‍थ‍ित‍ि में है भारत

आईएमएफ के इस अपडेट से पता चलता है कि वर्तमान में भारत अपनी विकास रफ्तार को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसकी मजबूती का मुख्य आधार घरेलू मांग और नियंत्रित महंगाई है। ये निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं जब नीति निर्माता और व्यवसाय दोनों वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत के चल रहे विकास पर इसके प्रभावों का लगातार आकलन कर रहे हैं।

आईएमएफ का यह आकलन भारत की आर्थिक ताकत को दर्शाता है। यह बताता है कि कैसे देश अपनी आंतरिक शक्ति के बल पर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है। महंगाई का नियंत्रण में रहना आम लोगों के लिए भी अच्छी खबर है। इससे उनकी क्रय शक्ति बनी रहती है। जीवन स्तर पर कम असर पड़ता है। यह भारत को एक स्थिर और आकर्षक इन्‍वेस्‍टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में भी स्थापित करता है।

भारत की अर्थव्यवस्था की यह मजबूत स्थिति कई वर्षों की नीतियों और सुधारों का परिणाम है। बुनियादी ढांचे में निवेश, डिजिटल क्रांति और सरकारी पहलों ने मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार किया है जो विकास को बढ़ावा देता है। आईएमएफ की यह रिपोर्ट इन प्रयासों की सफलता को हाईलाइट करती है। साथ ही भविष्य के लिए एक सकारात्मक नजरियो पेश करती है। यह दर्शाता है कि भारत न केवल अपनी जनता के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना रहेगा।

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