भारतीय दफ्तरों में भी बढ़ रही है AI की धमक, जानते हैं कौन अपना रहे हैं इसे तेजी से?
Updated on
21-11-2023 02:11 PM
नई दिल्ली: नए जमाने के वर्क प्लेस (Work Places) की बात करें तो भारत में पांच तरह के लोग यहां काम करते हैं। पहला तो प्रॉब्लम सॉल्वर (Problem Solver), दूसरा रोड वॉरियर (Road Warriors), तीसरा डिटेक्टिव (Detectives), चौथा नेटवर्कर (Networker) और पांचवा एक्सप्रेशनिस्ट (Expressionist)। इनमें से दो आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (Artifitial Intelligence) या एआई तथा टेक्नोलॉजी (Technology) को अपनाने में आगे है। इस रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट ग्लोबल रिसर्च फर्म YouGov और Slack ने जारी किया है। इसके मुताबिक भारत में प्रॉब्लम सॉल्वर और एक्सप्रेशनिस्ट एआई और टेक्नोलोजी को अपनाने में आगे हैं।
भारत में तो ये हैं आगे
इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए भारत समेत नौ प्रमुख मार्केट में 15,000 से भी ज्यादा डेस्क वर्कर के बीच सर्वे किया गया। इनमें से 2,000 डेस्क वर्कर भारत के हैं। इससे पता चला कि भारतीय बाजार में प्रॉब्लम सॉल्वर और एक्सप्रेशनिस्ट इसे अपनााने में आगे हैं। ये ऑटोमेशन के मास्टर हैं और एआई जैसे टूल्स को तेजी से अपना रहे हैं। इससे इनका और इनके सहयोगियों का काम तेजी से निपट रहा है। एक्सप्रेशनिस्ट तो GIFs, Memes and Emojis के जरिये अपने काम में बहुलता का प्रभाव ला रहे हैं। ये ही नए तकनीक को अपनाने में दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं।
प्रॉब्लम सॉल्वर और एक्सप्रेशनिस्ट भारत में एआई एडॉप्शन का नेतृत्व कर रहे हैं
इस अध्ययन में सामने आया कि भारत में AI यूज करने वाले सबसे ज्यादा कॉमन वर्कफोर्स प्रॉब्लम सॉल्वर्स का है। इनमें 23 प्रतिशत वर्कफोर्स शामिल है। प्रॉब्लम सॉल्वर्स टेक और ऑटोमेशन में निपुणता रखते हैं, और एआई एवं कार्य की प्रक्रियाओं को स्ट्रीमलाईन करने के लिए अत्यधिक उत्साहित हैं। उनमें से 92 प्रतिशत अरली टेक एडॉप्टर्स हैं, और 77 प्रतिशत एआई की ओर उत्सुक हैं। अपने काम में एआई का उपयोग करने के लिए प्रॉब्लम सॉल्वर का उत्साह स्पष्ट दिखाई देता है। उनमें से 43 प्रतिशत प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करना चाहते हैं। अध्ययन में सामने आया कि ये लोग 54 प्रतिशत हैं, जो भारत में एआई के सबसे ज्यादा उपयोग में अपना योगदान देते हुए एक्सटर्नल टेक प्रशिक्षण चाहते हैं, इसके बाद 34 प्रतिशत के साथ सिंगापुर का स्थान है।
एक्सप्रेशनिस्ट की अच्छी खासी संख्या एक्सप्रेशनिस्ट के पास एक मजबूत विज़्युअल कम्युनिकेशन स्टाईल होता है, जो भारत के कार्यबल में 21 प्रतिशत हैं। वो एमोजी, जीआईएफ और मेमेज़ द्वारा कार्यस्थल के संवाद को कम औपचारिक और ज्यादा दिलचस्प बनाते हैं। विश्व में 72 प्रतिशत एक्सप्रेशनिस्ट कम्यूनिकेशन बढ़ाने के लिए इन विज़्युअल टूल्स का उपयोग करते हैं, जबकि ऐसे डेस्क कर्मियों की संख्या 29 प्रतिशत है। उनका मानना है कि कार्यस्थल का संचार मनोरंजक और दिलचस्प होना चाहिए, और वर्चुअल कनेक्शन स्थापित करने और अपेक्षा के अनुरूप संदेश पहुँचाने के लिए इन विज़्युअल एलिमेंट्स का उपयोग होना चाहिए। एक्सप्रेशनिस्ट का वर्चस्व दक्षिण कोरिया (15 प्रतिशत) और सिंगापुर (12 प्रतिशत) में भी है।
भारत में डिटेक्टिव और रोड वारियर्स कम प्रचलित
इस सर्वेक्षण के नतीजों में यह भी पाया गया कि भारत में डिटेक्टिव्स कम हैं। वर्कप्लेसेज पर ऐसे व्यक्ति अपनी इंवेस्टिगेटिव और नॉलेज शेयरिंग टेंडेंसी के लिए जाने जाते हैं। रोड वॉरियर्स, जो फ्लेक्जिबिलिटी और रिमोट कनेक्शन पर पनपते हैं, की संख्या भारत में कम है। हालांकि ये जापान में 28% और सिंगापुर 26% हैं। भारत में इनकी हिस्सेदारी कुल वर्कफोर्स में महज 18% की है। वे आउटगोइंग, अनुकूलनीय हैं और अपने शेड्यूल के अनुसार विभिन्न स्थानों से काम करने को प्राथमिकता देते हैं।
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