भारत के लिए मुसीबत बनेगी अमेरिका और चीन की दोस्ती, क्या 'मेक इन इंडिया' को लगेगा झटका, इंडस्ट्री में कैसा डर?
Updated on
10-11-2025 01:03 PM
नई दिल्ली: ट्रेड वॉर के बीच अमेरिका और चीन नजदीक आते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जहां चीन पर लगाए गए टैरिफ में नरमी दिखाई है तो वहीं चीन ने भी कुछ ढील दी है। वहीं इन दोनों देशों की नजदीकी भारत के लिए मुसीबत बन सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पर दिखाई दे सकता है। इसे लेकर इंडस्ट्री ने अपनी चिंता भी सरकार के सामने जताई है।
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने सरकार से कहा है कि वह अपनी सहायक नीतियों को जारी रखे। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इंडस्ट्री को चिंता है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध सामान्य हो जाते हैं, तो इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट की वह प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी जो उसने बड़ी मुश्किल से हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री 'मेक इन इंडिया' की सबसे बड़ी सफलता की कहानी है। अगर इस इंडस्ट्री को नुकसान होता है तो यह 'मेक इन इंडिया' स्कीम के लिए भी झटका होगा।
नई दिल्ली: ट्रेड वॉर के बीच अमेरिका और चीन नजदीक आते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जहां चीन पर लगाए गए टैरिफ में नरमी दिखाई है तो वहीं चीन ने भी कुछ ढील दी है। वहीं इन दोनों देशों की नजदीकी भारत के लिए मुसीबत बन सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पर दिखाई दे सकता है। इसे लेकर इंडस्ट्री ने अपनी चिंता भी सरकार के सामने जताई है।
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने सरकार से कहा है कि वह अपनी सहायक नीतियों को जारी रखे। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इंडस्ट्री को चिंता है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध सामान्य हो जाते हैं, तो इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट की वह प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी जो उसने बड़ी मुश्किल से हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री 'मेक इन इंडिया' की सबसे बड़ी सफलता की कहानी है। अगर इस इंडस्ट्री को नुकसान होता है तो यह 'मेक इन इंडिया' स्कीम के लिए भी झटका होगा
इस एसोसिएशन ने यह भी बताया है कि अगर यह स्थिति बनी रहती है या इसमें और ढील दी जाती है तो यह भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता, निवेश के प्रति आकर्षण और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत उत्पादन की गति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। ICEA में एप्पल, गूगल, मोटोरोला, फॉक्सकॉन, वीवो, ओप्पो, लावा, डिक्सन, फ्लेक्स और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां सदस्य हैं।
चीन को क्या होगा फायदा?
वैश्विक व्यापार और राजनीतिक हालात ऐसे हो सकते हैं कि चीन अंततः भारत और अन्य देशों की तुलना में टैरिफ के मामले में नुकसान में न रहे। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि वाशिंगटन ने घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए बीजिंग के साथ अपने व्यापार के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल शर्तें तय की हैं। ऐसा तब है कि चीन सैद्धांतिक रूप से अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है। लेकिन अब माहौल कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है।
नई दिल्ली: रेयर अर्थ को नए जमाने की टेक्नोलॉजी की रीढ़ कहा जाता है। इनका यूज इलेक्टिक वीकल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस में होता है। अभी इसकी सप्लाई चेन पर…
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर से संकट गहरा गया है। यही वजह है कि कच्चे तेल की ढुलाई पर एक बार फिर से जियोपोलिटकल रिस्क प्रीमियम (Geopolitical…
नई दिल्ली: सरकार ने अनुराग जैन को नीति आयोग का नया सीईओ नियुक्त किया है। अनुराग जैन मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं। कैबिनेट की नियुक्ति…
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में करीब 2% गिरावट आई। बीएसई पर यह…
नई दिल्ली: पूंजी बाजार में एथिकल इन्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए NSE ने निफ्टी 500 अहिंसा इंडेक्स की शुरुआत की है। इसमें निफ्टी 500 की उन कंपनियों को शामिल…
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके…