न बुलेटप्रूफ वेस्ट था, न भीड़भाड़ में एनकाउंटर का प्लान... बाटला हाउस में उस दिन क्या हुआ था, पूरी कहानी
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29-01-2023 05:46 PM
नई दिल्ली: बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी शहजाद अहमद उर्फ पप्पू की शनिवार को मौत हो गई। आजमगढ़ निवासी शहजाद का दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा था। वह लंबे समय से तिहाड़ जेल में बंद था। आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) का सक्रिय सदस्य शहजाद 2008 के बाटला हाउस के एनकाउंटर में शामिल था। पुलिस को बाटला हाउस स्थित मकान से शहजाद का पासपोर्ट मिला था। पुलिस ने जब साल 2010 में गिरफ्तार किया तो उसने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को गोली मारने की बात स्वीकार की थी। इस मामले में अदालत ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई थी। शहजाद पर अन्य मामलों में भी मुकदमा चल रहा था। इनमें से एक मुकदमा बेंगलुरु में दर्ज हुआ था। साल 2008 में दिल्ली में हुए विस्फोटों से कुछ पहले ही शहजाद दिल्ली आया था। सितंबर 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर पर राजनीति भी खूब हुई। गाहे-बगाहे कुछ नेता एनकाउंटर पर ही सवाल उठाते रहे। पढ़ें, दिल्ली के बाटला हाउस एनकाउंटर की पूरी कहानी।
बाटला हाउस एनकाउंटर से पहले बम धमाकों से दहल उठी थी दिल्ली
13 सितंबर, 2008 को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बम धम धमाके हुए। कनॉट प्लेस, ग्रेटर कैलाश, करोलबाग और इंडिया गेट जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में। धमाकों की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन ने ली। उन धमाकों में 26 लोगों की मौत हुई और 133 घायल हुए। देश के दिल में किए गए इन धमाकों को मार्च 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' करार दिया।
19 सितंबर 2008... गोलियों की गूंज से थर्रा गया दिल्ली का जामिया नगर
दिल्ली पुलिस ने बम धमाकों के सिलसिले में पांच मुकदमे दर्ज किए। धमाकों में शामिल अपराधियों की धरपकड़ शुरू हो चुकी थी। एक मोबाइल नंबर की पहचान हुई। उसे ट्रेस पर लगाया गया। एक लोकेशन मिली, जामिया नगर के बाटला हाउस स्थित एक घर की। इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नेतृत्व में एक टीम 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस के मकान नंबर L-18 पर पहुंची। फ्लैट में सबसे पहले घुसने वालों में सब-इंस्पेक्टर धर्मेंद्र थे। उन्होंने फॉर्मल शर्ट, टाई और ट्राउजर्स पहन रखी थी। वह एक टेलिकॉम कंपनी का एक्जीक्यूटिव बनकर गए थे। तब एसीपी रहे संजीव यादव उस वक्त L-18 की सीढ़ियां चढ़ रहे थे जब उन्होंने गोलियों की आवाज सुनी। ऊपर गए सात में तीन पुलिसकर्मियों को गोली लगी। यादव ने अपने साथियों को शर्मा व अन्य घायल पुलिसकर्मियों को नीचे लाते देखा।
बुलेटप्रूफ वेस्ट तक नहीं पहने थे पुलिसवाले, क्यों?
जामिया नगर बेहद घनी आबादी वाला इलाका है। पुलिस को जरा भी अंदाजा नहीं था कि गोलियों की बौछार हो जाएगी। पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ वेस्ट्स तक नहीं पहने हुए थे। यादव बताते हैं कि 'हम जामिया नगर जैसे इलाके में ऐसी गोलीबारी सोचकर नहीं गए थे। पहली टीम के पास तो बुलेटप्रूफ वेस्ट्स तक नहीं थीं। यह एक अनकहा प्रोटोकॉल था कि हम उस इलाके में पुलिस गियर पहनकर नहीं जाते थे... विवाद से बचने के लिए।'
ऊपर से आती गोलियों की आवाज और घायल साथियों को देख यादव को समझने में वक्त नहीं लगा कि क्या चल रहा है। वह, इंस्पेक्टर राहुल और हेड कॉन्स्टेबल राजवीर गोलियों की बौछार के बीच फ्लैट के बाईं तरफ वाले कमरे में दाखिल हुए। एसीपी ने रिटर्न फायर में छोटा साजिद को ढेर कर दिया। यादव उस दिन को याद करते हुए बताते हैं, 'हमने फिर से कमरे में घुसने की कोशिश की। राजवीर को दो बार बुलेटप्रूफ वेस्ट पर गोली लगी। आगे बढ़े तो बाथरूम में हमने मोहम्मद सैफ को पाया। वह निहत्था था और चिल्ला रहा था कि सरेंडर को तैयार हूं। उसे बिना नुकसान पहुंचाए बाहर लाया गया।'
बाटला हाउस एनकाउंटर में मोहम्मद साजिद (छोटा साजिद) और मोहम्मद आतिफ अमीन मारे गए। आरिज खान और शहजाद अहमद फरार हो गए थे। सैफ के खिलाफ पुलिस ने कोई केस नहीं बनाया। एनकाउंटर के दौरान घायल हुए इंस्पेक्टर शर्मा ने बाद में दम तोड़ दिया।
कैसे पकड़े गए फरार आतंकी? बाटला हाउस एनकाउंटर के कुछ हफ्तों बाद ही आरिज नेपाल पहुंच गया। वहां की नागरिकता लेकर उसने मोहम्मद सलीम के नाम से पासपोर्ट भी बनवा लिया था। पहले उसने ढाबा खोला फिर कुछ स्कूलों में पढ़ाया भी। आईएम के झंडाबरदारों- भटकल बंधुओं के कहने पर बीच में आरिज ऊदी अरब भी गया। आरिज और शहजाद की तलाश में पुलिस टीमें लगी हुई थी। 2010 में यूपी की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने शहजाद को आजमगढ़ से दबोचा। वह अपने दादा के घर रह रहा था। दिल्ली की साकेत अदालत ने उसे 2013 में दोषी करार दिया।
आरिज अब भी गिरफ्त से दूर था। एनकाउंटर को लेकर तमाम राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए, कई तरह की जांच हुई, आयोग बने... केस को लॉजिकल एंड तक पहुंचाने में आरिफ अहम कड़ी था। जनवरी 2018 में डीसीपी प्रमोद कुशवाहा की टीम को खान की भनक लगी। एक टीम नेपाल भेजी गई। महीने भर चले ऑपरेशन में आरिज खान को पकड़ लिया गया।
शहजाद अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उसने 28 जनवरी 2023 को दम तोड़ दिया। मार्च 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने आरिज खान को इंस्पेक्टर शर्मा की हत्या का दोषी करार दिया और मौत की सजा सुनाई।
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