त्रिपुरा में सबसे रोचक होगी चुनावी जंग
त्रिपुरा में बीजेपी को वहां के आदिवासियों की पार्टी इंडिजेनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) से बड़ा खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीएफटी, बीजेपी को इस बार के चुनाव में सीधी टक्कर दे सकती है। आईपीएफटी और त्रिपुरा मोथा के बीच विलय प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है। त्रिपुरा मोथा प्रदेश के राजपरिवार के वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य देबराम की पार्टी है। वहीं, बीजेपी से गद्दी छीनने के लिए कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI)(M) भी हाथ मिला सकती है। 25 वर्षों तक अपने शासन वाले प्रदेश के फिसलकर बीजेपी के हाथ में चले जाने की कसक सीपीएम को अब भी सता रही है। उसे पता है कि अगर बीजेपी ने वापस सत्ता में आ गई तो वहां से पार्टी को आगे उखाड़ पाना और भी कठिन हो जाएगा। ध्यान रहे कि बीजेपी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में वामदल से त्रिपुरा की सत्ता छीनी थी।
