जीरो बैलेंस बैंक अकाउंट वालों को मिलेंगी ढेर सारी फ्री की सुविधाएं, RBI ने बैंकों को दिया 7 दिन का समय
Updated on
06-12-2025 12:38 PM
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने जीरो बैलेंस वाले बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट्स के लिए फ्री सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया है। रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे इन खातों को कोई 'कमतर' या 'काम-चलाऊ' विकल्प न मानें, बल्कि इन्हें भी नॉर्मल सेविंग्स अकाउंट जैसी ही सर्विस दें। अगर कोई लिखित या ऑनलाइन अर्जी देता है, तो बैंक को 7 दिनों में सेविंग्स अकाउंट को BSBD में बदलना होगा। ये निर्देश अगले साल 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बैंकों को यह भी कहा गया है कि अगर कोई ग्राहक रिक्वेस्ट करता है, तो उसके मौजूदा सेविंग्स अकाउंट को भी बीएसबीडी अकाउंट में बदल दिया जाए। नए नियमों के मुताबिक, हर बीएसबीडी अकाउंट में कैश जमा करने, ऑनलाइन या चेक से पैसा मंगाने की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही, महीने में कितनी भी बार पैसा जमा करने पर कोई रोक-टोक नहीं होगी।
ये मिलेंगी सुविधाएं
ग्राहकों को बिना किसी सालाना चार्ज के एटीएम या एटीएम-कम-डेबिट कार्ड मिलेगा।
साल में कम से कम 25 पन्नों वाली चेक बुक, फ्री इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग और फ्री पासबुक या मंथली स्टेटमेंट भी मिलेगा।
महीने में कम से कम चार बार पैसा निकालना फ्री होगा।
डिजिटल पेमेंट- जैसे कार्ड स्वाइप (PoS), NEFT, RTGS, UPI और IMPS को इन चार बार की लिमिट में नहीं गिना जाएगा।
बैंकों की नहीं चलेगी कोई शर्त
ये सुविधाएं ग्राहक के मांगने पर ही मिलेंगी और बैंक इन्हें खाता खोलने या चलाने की शर्त नहीं बना सकते। जिनके पास पहले से बीएसबीडी खाता है, अगर वे रिक्वेस्ट करेंगे तो उन्हें भी ये नई फ्री सुविधाएं मिल जाएंगी। बैंक चाहें तो कुछ एक्स्ट्रा फीचर्स दे सकते हैं लेकिन इसके लिए वे 'मिनिमम बैलेंस' रखने की शर्त नहीं थोप सकते। यह ग्राहक की मर्जी पर होगा कि वे वो फीचर लेना चाहते हैं या नहीं। बीएसबीडी खाता खोलने के लिए कोई पैसा जमा करने की जरूरत नहीं है।
आरबीआई ने ठुकराए बैंकों के सुझाव
बैंकों ने सुझाव दिया था कि बीएसबीडी खाते खोलने के लिए ग्राहकों की आय और प्रोफाइल के आधार पर कुछ शर्तें तय की जाएं। लेकिन रिजर्व बैंक ने इस सुझाव को ठुकरा दिया है। रिजर्व बैंक का कहना है कि ऐसी शर्तें लगाने से बीएसबीडी खाते का मकसद पूरा नहीं होगा, जो कि सभी के लिए एक सस्ता बैंकिंग प्रोडक्ट उपलब्ध कराना है।
बैंकों ने यह भी कहा था कि इन खातों का गलत इस्तेमाल हो सकता है, जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग के लिए। इसलिए वे चाहते थे कि इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर रोक लगाई जाए। लेकिन आरबीआई ने इस मांग को भी नहीं माना। बैंकों ने यह भी कहा था कि वे नाबालिगों के खातों में पैसे जमा करने या बैलेंस रखने पर कुछ पाबंदियां लगाना चाहते हैं, ताकि जोखिम कम हो सके। रिजर्व बैंक ने इस बात को मान लिया है।
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