किसान रोज आसमान की तरफ टकटकी लगाए इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद आज भी बारिश हो जाए तो उनकी यह फसल बच जाए। रोज एक एक दिन बारिश के बिना बीत रहे है। वैसे वैसे किसानों की उम्मीद भी टूटने लगी है।
बुजुर्ग मोहम्मद कासिम जैसे सैकड़ों किसान रोज अपने खेतों में बैठकर आसमान की ओर टकटकी लगाए देखते हैं। शायद अब भी बारिश हो जाए तो उनके खेतों में खड़ी फसलें लहलहा उठे। मोहम्मद कासिम की तरह गोपालगंज के सैकड़ो किसानों ने भी खेती की है। उन्हें भी उम्मीद है की समय पर बारिश हो जायगी तो उनकी फसल बच जाएगी।
किसान रोज आसमान की तरफ टकटकी लगाए इस उम्मीद में बैठे हैं कि शायद आज भी बारिश हो जाए तो उनकी यह फसल बच जाए। रोज एक एक दिन बारिश के बिना बीत रहे है। वैसे वैसे किसानों की उम्मीद भी टूटने लगी है।