ट्रंप के टैरिफ से शेयर बाजार में हाहाकार, मार्केट खुलते ही 600 अंक से अधिक टूटा सेंसेक्स
Updated on
26-08-2025 02:14 PM
नई दिल्ली: अमेरिका ने भारतीय सामान पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। इसमें बताया है कि नया टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो जाएगा। इस पर घरेलू बाजार में आज हाहाकार मचा हुआ है। सुबह 9:32 बजे बीएसई सेंसेक्स 614 अंक गिरकर 81,020.81 पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी 50 इंडेक्स में भी 173 अंकों की गिरावट आई और यह 24,794 पर कारोबार कर रहा था।
सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। इन शेयरों में 1% से 2% तक की कमी देखी गई। ये सभी 30 शेयरों वाले सेंसेक्स को नीचे खींच रहे थे। सेक्टोरल आधार पर देखें तो वित्तीय इंडेक्स में 0.8% की गिरावट आई। निफ्टी बैंक 0.9% और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.6% नीचे थे। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े बैंकों के शेयरों में गिरावट के कारण ऐसा हुआ। इन दोनों बैंकों के शेयर 1.2% तक गिर गए।
टैरिफ को लेकर नोटिस
इस बीच आईटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई। ये कंपनियां अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से करती हैं। शुरुआती कारोबार में इनमें 0.2% की गिरावट आई। बाजार का माहौल तब और खराब हो गया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह टैरिफ पहले से लगे 25% टैरिफ के ऊपर होगा। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने सोमवार को एक ड्राफ्ट नोटिस जारी किया। इसमें नए टैरिफ लगाने की प्रक्रिया बताई गई है।
माना जा रहा है कि अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान होगा। उन्हें वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि कमजोर कमाई और ऊंचे टैरिफ जैसी चुनौतियों के बावजूद बाजार मजबूत बना हुआ है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि कमजोर कमाई के साथ बाजार का मजबूत बने रहना भारत को दुनिया का सबसे महंगा बाजार बनाता है। इसलिए विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। लेकिन घरेलू निवेशकों की भारी खरीदारी ने बिकवाली को पूरी तरह से ढक दिया है। इससे बाजार मजबूत बना हुआ है।
बाजार की मजबूती
विजयकुमार ने आगे कहा कि चूंकि बाजार की मजबूती का मुख्य कारण लिक्विडिटी है और लिक्विडिटी का प्रवाह जारी रहने की संभावना है, इसलिए बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है और ऊंचे वैल्यूएशन बने रह सकते हैं। निवेशकों को छोटे शेयरों से बचना चाहिए जो बहुत महंगे हैं और बड़े शेयरों पर ध्यान देना चाहिए जो उचित मूल्य पर हैं। कुल मिलाकर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ हैं। हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिल रहा है।
नई दिल्ली: रेयर अर्थ को नए जमाने की टेक्नोलॉजी की रीढ़ कहा जाता है। इनका यूज इलेक्टिक वीकल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस में होता है। अभी इसकी सप्लाई चेन पर…
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर से संकट गहरा गया है। यही वजह है कि कच्चे तेल की ढुलाई पर एक बार फिर से जियोपोलिटकल रिस्क प्रीमियम (Geopolitical…
नई दिल्ली: सरकार ने अनुराग जैन को नीति आयोग का नया सीईओ नियुक्त किया है। अनुराग जैन मध्य प्रदेश कैडर के 1989 बैच के IAS अधिकारी हैं। कैबिनेट की नियुक्ति…
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में करीब 2% गिरावट आई। बीएसई पर यह…
नई दिल्ली: पूंजी बाजार में एथिकल इन्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए NSE ने निफ्टी 500 अहिंसा इंडेक्स की शुरुआत की है। इसमें निफ्टी 500 की उन कंपनियों को शामिल…
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके…