अमेरिका 1, भारत 2, जर्मनी 3... निवेश के लिए दुनियाभर के सीईओ को भाया हिंदुस्तान
Updated on
21-01-2026 12:18 PM
नई दिल्ली: एक सर्वे में पता चला है कि अमेरिका के बाद भारत दुनिया भर के सीईओ के लिए निवेश का दूसरा सबसे पसंदीदा ठिकाना बन गया है। जर्मनी और यूके भी इसी लिस्ट में शामिल हैं। इस लिस्ट में 5वें नंबर पर चीन है। यह सर्वे PwC ने किया है।
सर्वे के मुताबिक, साल 2026 तक करीब 13% ग्लोबल सीईओ भारत को निवेश के लिए चुनेंगे। यह पिछले साल यानी 2025 के 7% से काफी ज्यादा है। वहीं, 35% सीईओ ने अमेरिका को पहली पसंद बताया है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार के सुधारों, जैसे जीएसटी और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीमों की वजह से भारत में निवेश का माहौल मजबूत हुआ है।
टैरिफ कितना बड़ा खतरा
सर्वे में एक और खास बात सामने आई है। भारत में सिर्फ 11% सीईओ को लगता है कि टैरिफ उनके बिजनेस के लिए खतरा है। यह तब है जब अमेरिकी सरकार ने भारतीय सामानों पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। अभी भी करीब 40% भारतीय एक्सपोर्ट, जैसे दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स, इन टैरिफ से बाहर हैं। हालांकि, टेक्सटाइल, लेदर और झींगा जैसे कुछ सेक्टरों पर इसका बुरा असर पड़ा है। इन कंपनियों ने अब दूसरे देशों में अपने सामान भेजने के रास्ते तलाशे हैं, और वे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी ध्यान दे रही हैं।
डोमेस्टिक ग्रोथ को लेकर कितने उत्साहित
भारत में 77% सीईओ को अपने देश के घरेलू बाजार में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। वहीं, दुनिया भर के सिर्फ 55% सीईओ अपने-अपने देशों में ग्रोथ को लेकर इतने उत्साहित हैं। भारत में 57% सीईओ को अपनी कंपनियों के लिए आने वाले समय में कमाई बढ़ने का पूरा भरोसा है। यह संख्या ग्लोबल सीईओ के मुकाबले लगभग दोगुनी है।
यह चेतावनी भी दी
सर्वे में एक चेतावनी भी दी गई है। भारत में 54% सीईओ और दुनिया भर में 49% सीईओ का मानना है कि अगले तीन सालों में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के आने से जूनियर लेवल की नौकरियों में कमी आएगी। AI एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और काम करने में मदद करती है।
इनोवेशन पर फोकस
भारतीय कंपनियां अब इनोवेशन के जरिए अपने बिजनेस को बढ़ा रही हैं। 57% सीईओ ने बताया कि उनकी कंपनियों ने पिछले पांच सालों में कम से कम एक नए सेक्टर में कदम रखा है। ग्रोथ के रास्ते में आने वाले खतरों की बात करें तो, 30% सीईओ ने मैक्रोइकोनॉमिक वोलेटिलिटी (अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव) को सबसे बड़ा खतरा बताया है। इसके बाद 23% लोगों ने साइबर सिक्योरिटी को खतरा माना है।
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