क्यों हो रहा है ऐसा
विदेशी निवेशक इस महीने चार दिन लिवाल रहे और शुक्रवार को 2,625 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी की। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा, ‘अक्टूबर के मध्य में अमेरिका में महंगाई में उम्मीद से बेहतर गिरावट ने बाजार को यह मानने का विश्वास दिला दिया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दरों में बढ़ोतरी कर दी है। इसके परिणाम स्वरूप अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी से गिरावट आई है और 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड प्रतिफल अक्टूबर मध्य में पांच प्रतिशत से घटकर अब 4.40 प्रतिशत हो गया।’मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के सह निदेशक एवं शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘अनिश्चित वैश्विक कारक भारत के शेयर बाजारों में विदेशी निवेश की दिशा तय कर रहे हैं।’ सितंबर में एफपीआई ने बिकवाली की सिलसिला शुरू किया था। इसके पीछे अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, बॉन्ड प्रतिफल में तेजी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और इजराइल-हमास संघर्ष से भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की अहम भूमिका रही थी। इस साल अब तक अक्टूबर में घरेलू इक्विटी बाजार में एफपीआई का कुल निवेश 6,381 करोड़ रुपये और ऋण बाजार में 12,400 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
