जानिए क्या है पूरा मामला
फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की थी। लाइन ऑफ कंट्रोल पर भारतीय और पाकिस्तानी वायुसेना के बीच टक्कर चल रही थी। ग्रुप कैप्टन (सेना के कर्नल रैंक के बराबर) चौधरी उस वक्त श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन के चीफ ऑपरेशन ऑफिसर थे। बालाकोट एयर स्ट्राइक के एक दिन बाद Mi-17 हेलिकॉप्टर एयरफील्ड से लौट रहा था तभी उसे मार गिराया गया था। इजरायल की स्पाई डार क्विक रिएक्शन एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल से हमला किया गया था। इस हमले में वायुसेना के 6 जवान और एक सिविलियन की मौत हो गई थी। सेना ने इसे युद्ध की आशंका के बीच इसे 'ब्लू ऑन ब्लू' घटना करार दिया था।
कोर्ट मार्शल के दौरान ग्रुप कैप्ट चौधरी को 5 आरोप का दोषी पाया गया। इसमें M-17 हेलिकॉप्टर की बिना पहचान किए कि वो दोस्त हैं या दुश्मन उसपर हमले का आदेश देना, ट्रांसपॉन्डर सिस्टम को स्विच ऑफ करना नियमों का उल्लंघन था, अगर IFF रेडार ऑन रहता तो हेलिकॉप्टर की पहचान हो पाती। अक्टूर 2019 कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी के बाद तत्कालीन वायुसेना चीफ आर के एस भदौरिया ने कहा था कि ये हमारी गलती थी। हमारे मिसाइल ने ही M-17 हेलिकॉप्टर को मार गिराया था। यह बहुत बड़ी गलती थी।
