चीन ने दिया 'धोखा' तो भारत को मिला इस देश का साथ, 5 साल तक का हो गया इंतजाम, किसानों को होगा फायदा
Updated on
14-07-2025 04:24 PM
नई दिल्ली: भारत के लिए एक अच्छी खबर है। इंडियन फर्टिलाइजर कंपनी (IPL), कृभको (KRIBHCO) और सीआईएल (CIL) ने सऊदी अरब की मादेन (Maaden) कंपनी के साथ एक समझौता किया है। यह समझौता डीएपी खाद की सप्लाई को लेकर है।
समझौते के अनुसार, मादेन कंपनी अगले पांच वर्षों तक हर साल 3.1 मिलियन टन डीएपी खाद भारत को देगी। यह समझौता इस वित्तीय वर्ष से शुरू हो गया है। दोनों कंपनियां आपसी सहमति से इस समझौते को पांच साल के लिए और बढ़ा सकती हैं। यह समझौता उस समय हुआ है, जब रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा सऊदी अरब की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनकी मौजूदगी में ही इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
चीन ने लगाई थी रोक
भारत में डीएपी खाद की कमी हो रही है। यूरिया के बाद डीएपी दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला खाद है। चीन ने फॉस्फेट के निर्यात पर रोक लगा दी है। फॉस्फेट डीएपी खाद बनाने के लिए बहुत जरूरी होता है। इस वजह से भारत में डीएपी का उत्पादन कम हो गया है। चीन ने 26 जून से विशेष खाद का शिपमेंट भी रोक दिया है। विशेष खाद का इस्तेमाल फल, सब्जियां और दूसरी फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इस समझौते से भारतीय किसानों को डीएपी खाद आसानी से मिल सकेगी। अभी खरीफ की फसल का सीजन चल रहा है। अगर शुरुआत में ही डीएपी की कमी हो जाती तो फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता था। डीएपी खाद बुवाई के तुरंत बाद इस्तेमाल किया जाता है।
निवेश का बढ़ावा देने पर भी चर्चा
अपनी यात्रा के दौरान जेपी नड्डा ने सऊदी अरब के उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री बंदर बिन इब्राहिम अल खोरायेफ के साथ भी बातचीत की। उन्होंने आपसी निवेश को बढ़ावा देने पर चर्चा की। खासकर, भारतीय सरकारी कंपनियों (PSU) के लिए सऊदी अरब के उर्वरक क्षेत्र में निवेश करने के अवसरों पर बात हुई। साथ ही सऊदी अरब भी भारत में निवेश कर सकता है।
कैसा है दोनों देशों के बीच व्यापार?
दोनों देशों ने डीएपी के साथ-साथ यूरिया जैसे दूसरे जरूरी खाद को भी शामिल करके द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे भारत की खाद सुरक्षा और मजबूत होगी। जेपी नड्डा ने कहा कि यह समझौता भारत के किसानों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। इससे उन्हें समय पर खाद मिल सकेगी और फसल का उत्पादन भी अच्छा होगा। वित्तीय वर्ष 2025 में भारत ने सऊदी अरब से 1.905 मिलियन टन डीएपी का आयात किया। यह पिछले वित्तीय वर्ष 2024 में आयात किए गए 1.629 मिलियन टन से लगभग 17% ज्यादा है।
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