दोषी करार दिए जाने के बाद सांसद/विधायकों के खुद ब खुद सदन की सदस्यता से अयोग्य हो जाने के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के तहत दो साल या उससे ज्यादा सजा के मामले में किसी सांसद या विधायक को अयोग्य करार दिए जाने का प्रावधान है। राहुल गांधी को अयोग्य करार दिए जाने के तुरंत बाद केरल के एक सोशल एक्टिविस्ट की ओर से इस मामले में अर्जी दाखिल की गई है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि खुद ब खुद अयोग्य करार दिए जाने का जो प्रावधान है, वह मनमाना और अवैध है। उसे गैर संवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि ऑटोमैटिक अयोग्यता का प्रावधान किसी चुने हुए प्रतिनिधि को जनता के प्रति कर्तव्य निभाने से रोकता है। यह लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ है। कानूनी प्रावधान में अपराध की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को नहीं देखा गया। अपराध की गंभीरता को देखे बिना सीधे तौर पर अयोग्य करार दिया जाना नेचरल जस्टिस के खिलाफ है।
