जॉब मार्केट में कहां खड़ी हैं हिंदू, मुस्लिम, सिख और क्रिश्चियन महिलाएं? आंकड़ों से समझिए
Updated on
12-10-2024 12:18 PM
नई दिल्ली: देश में जॉब करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी आ रही है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर फोर्स में काम करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 साल में यानी 2017-18 से लेकर 2023-24 तक बेरोजगारी दर में 50 फीसदी तक की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 वर्षों में ग्रामीण हो या शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है।
दोगुने से ज्यादा हुई मुस्लिम महिलाओं की संख्या
जॉब करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में भी 6 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में सिर्फ 9 फीसदी मुस्लिम महिलाएं नौकरी करती थीं। अब इसमें 2.3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यानी अब 20.7 फीसदी मुस्लिम महिलाएं जॉब करती हैं।
मुस्लिम महिलाओं के बाद सिख महिलाओं के जॉब करने की संख्या में तेजी आई है। 6 वर्षों में यह 11 सिर्फ से बढ़कर 24.6 फीसदी हो गया है। इसमें 124 फीसदी की तेजी आई है। इसके बाद हिंदू महिला कामगारों की संख्या बढ़ी है। इसमें करीब 84 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन 6 वर्षों में यह आंकड़ा 17.6 फीसदी से बढ़कर 32.3 फीसदी हो गया है। क्रिश्चियन महिलाओं की संख्या 80 फीसदी बढ़ी है। 6 साल पहले 20.2 फीसदी क्रिश्चियन महिलाएं जॉब करती थीं। अब यह आंकड़ा 36.3 फीसदी है।
एसटी वर्ग की महिलाएं सबसे आगे
सबसे ज्यादा जॉब अनुसूचित जनजाति महिला की महिलाएं करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या 46 फीसदी है।
अनपेड जॉब करने वाले भी कम नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो बिना सैलरी या भत्ते के नौकरी करते हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इन 6 वर्षों में 16 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं यानी 2.8 करोड़ हर साल। इनमें से सालाना एक करोड़ ऐसी नौकरियां हैं जो परिवार के बिजनस से जुड़ी हैं। या फिर ऐसे लोग हैं जो सेल्फ एम्प्लॉइड हैं। इनमें काम करने वालों को कोई सैलरी नहीं मिलती। यानी ये अनपेड जॉब करते हैं।
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