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शक्तिकांत दास कौन हैं जो अब पीएम मोदी का बनेंगे साया, हर मुश्किल वक्‍त में नैया लगाई पार

Updated on 23-02-2025 02:29 PM
नई दिल्‍ली: पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव-2 होंगे। शनिवार को केंद्र सरकार ने यह नियुक्ति की। दास 1980 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं और तमिलनाडु कैडर से आते हैं। उनका कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल तक रहेगा या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो। दास पीके मिश्रा के साथ काम करेंगे, जो प्रमुख सचिव-1 हैं। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने यह आदेश जारी किया है। शक्तिकांत दास पीएम मोदी के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं।
शक्तिकांत दास आरबीआई के 25वें गवर्नर रह चुके हैं। उन्होंने 11 दिसंबर 2018 को उर्जित पटेल के बाद पदभार संभाला था। पटेल के अचानक इस्‍तीफे के बाद उन्‍होंने आरबीआई की कुर्सी संभाली थी। गवर्नर बनने से पहले दास आर्थिक मामलों के सचिव और G20 में भारत के शेरपा थे। वह IMF, G20 और BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दास ने नोटबंदी और GST जैसे बड़े सुधारों में अहम भूमिका निभाई। आरबीआई गवर्नर के रूप में उन्होंने वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास पर फोकस किया। कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।

ओडिशा में हुआ जन्‍म, यहां से पढ़ाई

शक्तिकांत दास का जन्म 1957 में ओडिशा में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक और स्नातकोत्तर किया है। उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि भी प्राप्त की है। यह उनकी शिक्षा का एक शानदार प्रमाण है।1980 में दास भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए। उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला। राज्य सरकार में उन्होंने कई पदों पर काम किया। जैसे, वाणिज्यिक कर आयुक्त और उद्योग के प्रमुख सचिव। बाद में वह केंद्र सरकार में आ गए। वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में सेवा की।

सरकार के कई सुधारों से जुड़ा है नाम

दास ने नोटबंदी और GST जैसे बड़े सुधारों में अहम भूमिका निभाई। मई 2017 में उन्हें आर्थिक मामलों का सचिव नियुक्त किया गया। इस भूमिका में वह सरकार की समग्र आर्थिक नीतियों के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने IBC और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के पुनर्पूंजीकरण और विलय जैसे कई सुधारों को लागू किया।
आर्थिक मामलों के सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दास नवंबर 2016 में उच्च मूल्य के नोटों को बंद करने के फैसले में शामिल थे। इस फैसले का उद्देश्य काला धन, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाना था। कई लोगों ने इस कदम की आलोचना की, लेकिन दास ने इसका बचाव किया। उन्होंने कहा था कि देश में काले धन और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए यह जरूरी था।

दास ने 1 जुलाई 2017 को लागू हुए GST को लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। GST ने कई अप्रत्यक्ष करों को बदल दिया। इसका उद्देश्य कर ढांचे को सरल बनाना और कर अनुपालन को बढ़ाना था। GST के सफल कार्यान्वयन के लिए राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने में दास महत्वपूर्ण थे।

IMF, G20 और BRICS में कर चुके हैं भारत का प्रत‍िन‍ित्‍व

दास कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शामिल रहे हैं। उन्होंने IMF, G20 और BRICS में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। 1991 में भारत के लिए $22 बिलियन के IMF बेलआउट पैकेज पर बातचीत में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हैम्बर्ग और ब्यूनस आयर्स में G20 बैठकों में दास भारत के शेरपा भी थे।

RBI के गवर्नर के रूप में दास ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर फोकस किया। उन्होंने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में लिक्विडिटी की कमी को दूर करने के लिए कई उपाय किए। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए।

अब पीएमओ में देंगे सेवाएं


केंद्र सरकार ने पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रधान सचिव-2 नियुक्त किया है। दास की नियुक्ति प्रधानमंत्री के कार्यकाल तक या अगले आदेश तक जारी रहेगी। पीके मिश्रा प्रधान सचिव-1 के पद पर रहेंगे। शक्तिकांत दास ने 10 दिसंबर, 2024 को आरबीआई गवर्नर का कार्यकाल पूरा किया था।

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