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रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर सिंह ब्रदर्स में क्यों मची है रार? 500 करोड़ रुपये का है मामला

Updated on 20-01-2026 01:25 PM
नई दिल्ली: देश की प्रमुख फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स भाई शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह एक बार फिर से आमने-सामने आ गए हैं। मामला फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढाल चैरिटेबल सोसायटी का है। एक समय भारत की हेल्थकेयर इंडस्ट्री में बड़ा नाम कमा चुके दोनों भाई के झगड़े अब आम हो गए हैं। साल 2019 में दोनों भाइयों को जापानी कंपनी दाइची सांक्यो केस में अवमानना का दोषी पाया गया था। दवा बनाने वाली दाइची सांक्यो ने 3500 करोड़ रुपये नहीं चुकाने पर सिंह बंधुओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

इस बार दोनों भाइयों के बीच राजन ढाल चैरिटेबल सोसायटी को लेकर रार मची है। मालविंदर की पत्नी जापना सिंह का आरोप है कि शिविंदर और उनकी पत्नी अदिति ने फर्जीवाड़ा कर उन्हें और अन्य मेंबर्स को सोसायटी से बाहर कर दिया है। इसके जरिए 500 करोड़ रुपये के वसंत कुंज स्थित फोर्टिस राजन ढाल अस्पताल और उसके सालाना 30 करोड़ रुपये के रेवेन्यू पर कब्जा कर लिया है।

कभी देश के हेल्थकेयर सिस्टम पर था राज

आज शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह बेशक आमने-सामने हों, लेकिन एक समय दोनों भाइयों की देश के हेल्थकेयर सिस्टम पर मजबूत पकड़ थी। साल 1937 में रणबीर (Ranbir) और गुरबक्स (Gurbax) नाम के दो चचेरे भाइयों ने मिलकर दवाओं के डिस्ट्रिब्यूशन की एक कंपनी की शुरुआत की।

रणबीर के नाम का शुरुआती अक्षर और गुरबक्स के नाम के आखिरी अक्षरों (Ran+Bax) को मिलाकर इसका नाम रैनबैक्सी पड़ा। साल 1952 में उन्होंने यह कंपनी भाई मोहन सिंह को बेच दी। उनके बाद उनके बेटे परविंदर सिंह ने कंपनी की कमान संभाली और इसने खूब तरक्की की। साल 2000 में परविंदर सिंह के निधन के बाद उनके दोनों बेटे मालविंदर और शिविंदर ने कंपनी का जिम्मा संभाल लिया। मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह रैनबेक्सी, फोर्टिस हेल्थकेयर और रेलिगेयर इंटरप्राइजेज के मालिक रह चुके हैं।

घाटे से लेकर कर्ज तक

बाद में दोनों भाइयों को वक्त ने ऐसी चोट दी की वे दिवालिया हो गए। साल 2008 में उन्होंने रैनबैक्सी में अपनी हिस्सेदारी जापान की कंपनी दाइची सांक्यो को 9576 करोड़ रुपये में बेच दी। इससे मिले पैसों में से उन्होंने साल 2009-10 में 2,000 करोड़ रुपये कर्ज और टैक्स चुकाने में खर्च किए। वहीं 1,700 करोड़ रुपये अपनी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी रेलिगेयर में और 2,230 करोड़ रुपये अपने हॉस्पिटल चेन फोर्टिस में निवेश किया। बाद में मंदी के कारण उन्हें काफी घाटा हुआ। कर्ज भी हो गया। अप्रैल 2010 में दोनों भाइयों को रेलिगेयर के बोर्ड से निकाल दिया गया।साल 2012 में दाइची ने सिंगापुर के इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में की गई अपनी अपील में कहा कि दोनों भाइयों ने उन्हें रैनबैक्सी डील में धोखा दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस डील के कुछ दिनों बाद ही अमेरिका ने रैनबैक्सी की दवाओं के आयात पर यह कहते हुए रोक लगा दी था कि उनकी दवाएं गुणवत्ता वाली नहीं हैं। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने दोनों भाइयों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए उन्हें दाइची को 50 करोड़ डॉलर हर्जाना देने का आदेश दिया।

दिवालिया होने की अर्जी

इंटरनेशनल कोर्ट के आदेश के बाद दोनों भाइयों पर कुल 13000 करोड़ की देनदारी हो गई। इस कर्ज को चुकाने के लिए उन्होंने फोर्टिस में अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। सिंह ब्रदर्स ने महज 10 साल में 22500 करोड़ रुपये गंवा दिए। शिविंदर ने अपने बड़े भाई मालविंदर पर सितंबर 2018 में उत्पीड़न, जालसाजी तथा कुप्रबंधन का आरोप लगाया और कहा कि वे अपने भाई से अलग हो रहे हैं। वित्तीय घोटाला करने के आरोप में 10 अक्टूबर, 2019 को दोनों भाइयों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पिछले साल अप्रैल में शिविंदर मोहन सिंह ने IBC कानून के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन दिया था।

अब कहां और कैसे हुआ विवाद

दोनों भाइयों के बीच विवाद अभी तक जारी है। पुलिस अफसरों के मुताबिक, जापना सिंह ने 22 अक्टूबर 2025 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढाल चैरिटेबल सोसायटी को लेकर आपराधिक साजिश, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में शिकायत दी थी।

आरोप था कि मार्च 2025 में सोसायटी की एक मीटिंग दिखाकर उन्हें और अन्य मेंबर्स को गलत तरीके से हटा दिया गया। इनके बदले अदिति की दादी, मां और भाई को सोसायटी में शामिल कर लिया गया। अदिति और शिविंदर समेत अन्य आरोपियों ने सोसायटी पर अपने पूरे कंट्रोल के लिए ऐसा किया। यह भी आरोप लगाया कि साजिश रच कर रिकॉर्ड में हेराफेरी कर मेंबरों को अवैध तरीके से हटाया गया। इसके जरिए सोसायटी के अस्पताल की 500 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी और उसके सालाना 30 करोड़ रुपये की कमाई हथियाने के लिए ऐसा किया।

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