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बिहार को पढ़ा-लिखा बनाने के नाम पर एनडीए में क्यों नहीं बन रही?

Updated on 22-12-2025 12:27 PM
पटना: केंद्र सरकार में मोदी सरकार को नीतीश कुमार का समर्थन है। वहीं बिहार में भी नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार चल रही है। हालांकि केंद्र की एक योजना में बिहार ने अब तक हिस्सा नहीं लिया है। यह योजना है केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी साक्षरता योजना 'उल्लास' (ULLAS/Understanding Lifelong Learning for All in Society), इस योजना में बिहार ने हिस्सा नहीं लिया है। इससे सवाल उठ रहा है कि बिहार को पढ़ा-लिखा बनाने के नाम पर एनडीए में क्यों नहीं बन रही? आइए जानते हैं इसके बारे में...


'उल्लास' का मकसद 2030 तक पूरे देश को साक्षर बनाना

दरअसल, केंद्र सरकार की 100 फीसदी साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करने की राह में बिहार एक बड़ी बाधा बनकर खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी साक्षरता योजना 'उल्लास' में बिहार की भागीदारी न होने से यह लक्ष्य खतरे में पड़ गया है। यह योजना 2022 में शुरू की गई थी, जिसका मकसद 2030 तक देश को पूरी तरह साक्षर बनाना है। इस योजना के तहत, 15 साल से ऊपर के उन लोगों की पहचान की जानी है जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। फिर उन्हें ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके से तीसरी कक्षा के स्तर की बुनियादी पढ़ाई-लिखाई और गणित सिखाई जानी है। इसके बाद एक परीक्षा होगी और जो पास होंगे, उन्हें साक्षर घोषित किया जाएगा।

पांच राज्य कर चुके हैं खुद को साक्षर घोषित

अब तक पांच राज्य/केंद्र शासित प्रदेश - हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा और लद्दाख - खुद को 'पूरी तरह साक्षर' घोषित कर चुके हैं। लेकिन बिहार और पश्चिम बंगाल ने अभी तक इस योजना में हिस्सा नहीं लिया है। खासकर बिहार की साक्षरता दर चिंता का विषय है।
2023-24 की पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में सात साल और उससे ऊपर के लोगों में साक्षरता दर सिर्फ 74.3 फीसदी है। यह देश में दूसरी सबसे कम दर है, आंध्र प्रदेश 72.6 फीसदी के साथ सबसे पीछे है। वहीं, पश्चिम बंगाल की साक्षरता दर 82.6 फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत 80.9 प्रतिशत से ऊपर है।
यह चिंता कोई नई नहीं है। 2011 की जनगणना में भी बिहार की साक्षरता दर सिर्फ 61.8 फीसदी थी, जो देश में सबसे कम थी। तब राष्ट्रीय औसत 73 प्रतिशत था। पश्चिम बंगाल उस समय भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर था, जिसकी साक्षरता दर 76.3 फीसदी थी। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय बार-बार बिहार का ध्यान 'उल्लास' योजना की ओर दिला रहा है। लिखित संचार के बाद हुई बैठकों में भी इस मुद्दे को उठाया गया है, क्योंकि राज्य में 'सबसे ज्यादा निरक्षर लोग' हैं।

धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले साल लिखा था नीतीश कुमार को पत्र

पिछले साल अक्टूबर में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर राज्य से इस योजना में भाग लेने का आग्रह किया था। उन्होंने लिखा, 'मुझे सूचित किया गया है कि उल्लास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान बिहार को आपके राज्य द्वारा अनुमानित 15.79 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। हालांकि, योजना लागू नहीं की गई है, न ही वार्षिक योजना प्रस्तुत की गई है, और न ही जारी किए गए धन का उपयोग किया गया है।'

उन्होंने आगे कहा, 'पूर्ण साक्षरता प्राप्त करने के महत्वपूर्ण महत्व को देखते हुए, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि उल्लास के लाभों का उपयोग करके राज्य को पूरी तरह साक्षर बनाने के लिए तत्काल कार्रवाई करें। 2030 तक 100 फीसदी साक्षरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में बिहार की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।'

'2023 में जारी धन का उपयोग करें'

इससे कुछ महीने पहले, जुलाई 2024 में स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बिहार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर राज्य से 2023 में जारी धन का उपयोग करने और 'उल्लास' योजना को लागू करने का आग्रह किया था। इस पत्र में 35.09 करोड़ रुपये की राशि का उल्लेख किया गया था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 21.05 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 14 करोड़ रुपये था। यह राशि 2023-24 में 18.80 लाख शिक्षार्थियों के लिए स्वीकृत की गई थी। स्वीकृत राशि का 75% पहला हिस्सा- 15.79 करोड़ रुपये, 2023 में बिहार को केंद्र के हिस्से के रूप में जारी किया गया था। हालांकि एक साल बाद भी बिहार ने राज्य खजाने से एसएनए (सिंगल नोडल एजेंसी) खाते में केंद्रीय हिस्से को समान राज्य हिस्से के साथ हस्तांतरित नहीं किया है।

व्यय विभाग के 16 फरवरी 2023 के पत्र के अनुसार, 'राज्य सरकार केंद्रीय हिस्से के साथ-साथ समान राज्य हिस्से को केंद्रीय हिस्से की प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर एसएनए खाते में हस्तांतरित करेगी।' इसके अलावा, एसएनए खाते में केंद्रीय हिस्से के हस्तांतरण में 30 दिनों से अधिक की देरी के दिनों की संख्या पर 1 अप्रैल 2023 से 7 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज लिया जाएगा।

बिहार के 'उल्लास' योजना में भाग न लेने की वजह क्या?

राज्य के इस योजना में भाग न लेने के बारे में पूछे जाने पर बिहार शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य की अपनी साक्षरता योजना 'अक्षर आंचल' का हवाला दिया। यह योजना लगभग डेढ़ दशक से चल रही है। इसका उद्देश्य दलित, महादलित, अल्पसंख्यक समुदायों, अति पिछड़े वर्गों और महिलाओं के बीच साक्षरता बढ़ाना है। इसमें 6-14 आयु वर्ग के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करना और 15-45 आयु वर्ग की महिलाओं के बीच बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि लक्षित समूहों की महिलाएं हर छह महीने में राज्य की ओर से आयोजित बुनियादी साक्षरता की परीक्षा देती हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि अक्षर आंचल योजना के लिए राज्य का खर्च 'उल्लास' पर खर्च होने वाली राशि से अधिक है।

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