कंगाल होने के कगार पर है पाकिस्तान
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों कंगाली से गुजर रही है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर को दूसरे देशों से खैरात मांगना पड़ रहा है। खुद शहबाज शरीफ ने कुछ दिनों पहले कहा था कि हमारे एक हाथ में परमाणु बम है और दूसरे में कटोरा। उन्होंने पाकिस्तान के लिए भीख मांगने को शर्मिंदगी भरा भी बताया था। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी 2014 के बाद सबसे निचले स्तर पर है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, देश के पास 5.8 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है।
बाढ़ के कारण चरम पर है महंगाई
पाकिस्तान में 2022 में आई बाढ़ ने कीमतों में आग लगा रखी है। आटा की कीमत सबसे ज्यादा है। पाकिस्तान के राज्य एक दूसरे पर गेहूं की खेप रोकने का आरोप लगा रहे हैं। गैस की काला बाजारी और जमाखोरी से लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। चीनी के लिए पाकिस्तानी सरकार को कोटा तय करना पड़ा है। प्याज और दूध की कीमत भी आम आदमी की पहुंच से बाहर जा चुकी है। यहां तक कि मुर्गे का मीट भी पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी तक महंगा हो गया है।
